मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव: यमन युद्ध की नई चुनौतियाँ
मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ते तनाव ने यमन युद्ध को और जटिल बना दिया है। सऊदी अरब का आरोप है कि यूएई ने एक अलगाववादी नेता को सुरक्षा प्रदान की है, जो यमन की संप्रभुता पर हमला है। यह घटनाक्रम न केवल यमन के लिए, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। यदि यह तनाव बढ़ता है, तो यमन में गृहयुद्ध और गहरा हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी।
Jan 8, 2026, 12:07 IST
सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ता तनाव
मध्य पूर्व की राजनीतिक स्थिति में एक नया और गंभीर तनाव उभर कर सामने आया है। सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने यमन के एक अलगाववादी नेता को अबू धाबी भेजा है, जिस पर राजद्रोह का मामला चल रहा है। यह नेता यमन में देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहा है और उस पर देश को तोड़ने तथा सशस्त्र विद्रोह को बढ़ावा देने का आरोप है। सऊदी अरब का कहना है कि यह कदम न केवल यमन की संप्रभुता पर हमला है, बल्कि उस गठबंधन के साथ भी विश्वासघात है जो हूती विद्रोहियों के खिलाफ बनाया गया था।
यमन में राजनीतिक संकट
सऊदी अरब का आरोप है कि जब यमन में राजनीतिक समझौते और सैन्य समन्वय की कोशिशें चल रही थीं, तब यूएई ने इस नेता को सुरक्षा प्रदान कर बाहर निकाला और अपने प्रभाव क्षेत्र में लाया। यह कदम उस समय उठाया गया जब सऊदी अरब यमन की एकता को बनाए रखने और वहां की सरकार को मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यमन युद्ध के भीतर एक और युद्ध का जन्म हो चुका है।
यमन का गृहयुद्ध और क्षेत्रीय प्रभाव
यमन पहले से ही वर्षों से गृहयुद्ध का सामना कर रहा है, जहां उत्तर में हूती विद्रोही, दक्षिण में अलगाववादी गुट और बीच में एक कमजोर केंद्र सरकार है। सऊदी अरब और यूएई लंबे समय तक एक ही पक्ष में खड़े रहे हैं, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों के हित कभी भी समान नहीं रहे। सऊदी अरब यमन को एक राष्ट्र के रूप में देखना चाहता है, जबकि यूएई दक्षिण यमन में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता
यह घटनाक्रम केवल यमन तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में जिस एकता और सामूहिक सुरक्षा की बात की जाती थी, वह अब कमजोर होती दिख रही है। सऊदी अरब और यूएई के बीच अविश्वास की खाई गहरी होती जा रही है, जिसका सीधा असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।
वैश्विक निहितार्थ
सऊदी अरब और यूएई के बीच टकराव एक बड़े भूचाल का संकेत है। जब दुनिया पहले से ही कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है, तब इन दोनों देशों के बीच तनाव वैश्विक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। यमन युद्ध पहले ही एक मानवीय त्रासदी बन चुका है, और यदि सहयोगी देश एक-दूसरे के खिलाफ कदम उठाने लगें, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
भविष्य की चुनौतियाँ
यदि यह तनाव बढ़ता है, तो यमन में गृहयुद्ध और गहरा होगा, जिससे अलगाववादी गुटों को और अधिक हथियार मिलेंगे। अंततः यमन एक ऐसे युद्धक्षेत्र में बदल सकता है जहां हर ताकत अपनी अलग लड़ाई लड़ रही होगी। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैलेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
संभावित परिणाम
यदि खाड़ी के शक्तिशाली देश अपने तात्कालिक स्वार्थों के लिए पूरे क्षेत्र को आग में झोंकते रहे, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। यह एक चेतावनी है कि यदि सत्ता की भूख और रणनीतिक अहंकार पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भविष्य और भी अंधकारमय हो सकता है।