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माली में विद्रोहियों का बढ़ता प्रभाव, रक्षा मंत्री की हत्या से स्थिति गंभीर

माली में विद्रोहियों ने हाल ही में रक्षा मंत्री नजरल सादियो कमारा की हत्या कर दी, जिससे देश में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। विद्रोही समूहों ने कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया है, और अब राजधानी बमाको में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। माली की सेना विद्रोहियों के हमलों से परेशान है, और सरकार ने इसे एक आतंकवादी हमला करार दिया है। जानें इस संघर्ष के पीछे की जड़ें और माली की वर्तमान स्थिति के बारे में।
 

माली में विद्रोह की शुरुआत

माली, जो अफ्रीका का एक गरीब देश है, में हाल ही में विद्रोह की लहर उठी है। विद्रोही समूहों ने रविवार को एक सुनियोजित हमले में रक्षा मंत्री नजरल सादियो कमारा को मार डाला, जिससे उनकी स्थिति और भी गंभीर हो गई। विद्रोहियों ने कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया है। माली, जो लंबे समय से संघर्ष का सामना कर रहा है, की सेना विद्रोहियों के हमलों से परेशान है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिहादियों और विद्रोहियों ने पूरे देश में एक साथ हमला किया है, और उत्तरी माली पर उनका कब्जा बढ़ता जा रहा है। अब वे राजधानी बमाको में घुसने की कोशिश कर रहे हैं।


हिंसा की ताजा घटनाएं

जुंटा के शासन वाले माली में हाल की हिंसा की घटनाएं चिंताजनक हैं। माली लंबे समय से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादियों के साथ-साथ उत्तरी क्षेत्र में अलगाववादी विद्रोह का सामना कर रहा है। सरकार ने रक्षा मंत्री की हत्या की पुष्टि करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। शनिवार को बमाको और अन्य शहरों पर एक साथ हमला हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। इस हमले ने माली के सुरक्षा साझेदार रूस को भी चुनौती दी है, जिनके सैनिक इस क्षेत्र में तैनात हैं।


हमले के परिणाम

सरकार ने शनिवार के हमलों में मारे गए लोगों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कहा गया है कि कम से कम 16 लोग घायल हुए हैं। सरकार ने इसे एक आतंकवादी हमला करार दिया है। बयान में कहा गया कि रक्षा मंत्री कमारा के आवास पर आत्मघाती हमलावरों ने हमला किया। उन्होंने हमलावरों का सामना किया, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई।


किदाल पर विद्रोहियों का कब्जा

अलगाववादी तुआरेगों के नेतृत्व वाले अजावाद लिबरेशन फ्रंट के प्रवक्ता ने बताया कि शनिवार के हमले के बाद रूसी अफ्रीका कोर के सैनिक और माली की सेना किदाल शहर से हट गई। प्रवक्ता ने कहा, 'किदाल आजाद हो गया है।' सरकारी टेलीविजन पर एक बयान में सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल उमर डियारा ने स्वीकार किया कि माली की सेना शहर छोड़ चुकी है।


विवाद की जड़ें

माली में 2012 से इस्लामिक उग्रवादी समूहों की सक्रियता ने देश को संवेदनशील बना दिया है। ये आतंकवादी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे हैं, जबकि उत्तरी माली के लोग एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। 2012 में विद्रोह के दौरान फ्रांस की सेना ने हस्तक्षेप किया था, लेकिन बाद में वहां से चली गई।


रूस का प्रभाव

माली में तख्तापलट के बाद से रूस का वैगनर ग्रुप इस्लामिक स्टेट के खिलाफ माली की सेना की मदद कर रहा था। हालांकि, जून 2025 में वैगनर ग्रुप ने माली छोड़ दिया। वर्तमान में, रूस की सेना के जवान यहां मौजूद हैं। माली की सत्ता पर काबिज जुंटा ने सभी राजनीतिक दलों को समाप्त कर दिया है और अपने आलोचकों के खिलाफ कार्रवाई की है।