मिडिल ईस्ट में तनाव: तुर्की की चुप्पी और अमेरिका के लिए नई चुनौतियाँ
मिडिल ईस्ट में तनाव की नई परतें
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष को 19 दिन हो चुके हैं और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस तनाव के बीच, तुर्की से एक महत्वपूर्ण खबर आई है जिसने रणनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। अमेरिका ने तुर्की से अनुरोध किया था कि वह अपने फाइटर जेट और ईंधन विमानों को अपनी जमीन पर उतरने की अनुमति दे। लेकिन अंकारा ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जो वाशिंगटन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि तुर्की नाटो का सदस्य है। मिडिल ईस्ट इंस्टिट्यूट के तुर्की कार्यक्रम के निदेशक गोल टोल के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने तुर्की से संपर्क किया था। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने सीधे तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय से बात की थी, लेकिन अब तक कोई औपचारिक उत्तर नहीं आया है। तुर्की की चुप्पी उसके रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
तुर्की की मध्यस्थता की कोशिशें
राष्ट्रपति रचयब तैयब अर्दवान ने पहले ही संसद में कहा था कि इस युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए, अन्यथा पूरा मिडिल ईस्ट आग की चपेट में आ सकता है। तुर्की संघर्ष से खुद को दूर रखते हुए मध्यस्थता की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। इसी संदर्भ में, तुर्की ने ओमान के साथ मिलकर ईरान को एक शांति प्रस्ताव भेजा, जिसे ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामनाई ने अस्वीकार कर दिया। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हो रहे हैं। अमेरिका के लिए तुर्की एक सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है, क्योंकि इराक में उसके बेस ईरानी हमलों के खतरे में हैं। हाल ही में इराक में एक ईंधन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसकी लॉजिस्टिक क्षमता प्रभावित हुई है।
तुर्की की रणनीतिक स्थिति
इस स्थिति में, तुर्की की भूमि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती थी। हालांकि, तुर्की इस जोखिम को समझता है। यदि उसने अमेरिका का समर्थन किया, तो वह सीधे ईरान के निशाने पर आ सकता है। नाटो सदस्य होने के नाते, ईरान के लिए तुर्की पर बड़े पैमाने पर हमला करना भी जोखिम भरा होगा, क्योंकि यह नाटो के अनुच्छेद पांच को सक्रिय कर सकता है। वर्तमान में, तुर्की केवल अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रहा है और सीधे युद्ध में शामिल होने से बच रहा है।
ईरान की स्थिति
मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं और तुर्की की भूमिका आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ईरान ने घोषणा की है कि देश की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारानी की शहादत हो गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार, अली लारानी ईरान के प्रमुख नेताओं में से एक थे। इस समय ईरान का हर नेता शहादत के जुनून में डूबा हुआ है। यह एक ऐतिहासिक लड़ाई है और कुद्स की अंतिम जंग है। स्पष्ट है कि इसमें बड़ी कुर्बानियाँ देनी होंगी। ईरान इस युद्ध को जीतने के लिए दृढ़ संकल्पित है और इसके लिए उसके पास 1000 लारीजानी तैयार हैं। ईरानी मीडिया का कहना है कि अमेरिका और इसराइल इस युद्ध में ईरान को पराजित नहीं कर सकते।