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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत को रूस से तेल की आपूर्ति

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने स्थिति को गंभीर बना दिया है, जिसमें अमेरिका और इजराइल के हमलों से हजारों ईरानी नागरिकों की जान गई है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। इस बीच, भारत पर इस संघर्ष का असर दिखने लगा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति में भारी कमी आई है। संकट के इस समय, रूस ने भारत को तेल की आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन दिया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
 

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का प्रभाव

मिडिल ईस्ट में लगातार हो रहे गंभीर हमलों ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों में हजारों ईरानी नागरिकों की जान जा चुकी है, और ईरान की सेना को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान ने भी इजराइल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों से जवाबी हमला करते हुए तबाही मचाई है। यह संघर्ष अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है, जिससे मिडिल ईस्ट के साथ-साथ पूरी दुनिया को खतरा हो सकता है। हाल ही में, अमेरिका ने श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत पर हमला कर उसे डुबो दिया, जिसमें 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई। यह युद्धपोत भारत में एक नौसेना अभ्यास में भाग लेकर लौट रहा था.


भारत पर संघर्ष का असर

अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी ने इस युद्धपोत पर हमला किया, जिससे भारत पर भी इस संघर्ष का प्रभाव पड़ने लगा है। ईरान पर हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में 70% की कमी आई है। भारत का लगभग 50% कच्चा तेल होर्मुज से आता है, जिससे क्रूड ऑयल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस संकट के समय, रूस ने भारत के लिए तेल की आपूर्ति बढ़ाने का निर्णय लिया है। रूस ने कहा है कि यदि पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो वह भारत को लगभग 95 लाख बैरल कच्चा तेल भेजने के लिए तैयार है.


रूस का समर्थन

भारतीय महासागर और एशियाई जल क्षेत्र में लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल टैंकरों में मौजूद है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर भारत भेजा जा सकता है। वर्तमान में, भारत के पास 25 दिन की मांग के बराबर तेल का स्टॉक है, जो लंबे समय तक चलने वाले संकट के लिए पर्याप्त नहीं है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। रूस ने भारत को अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराने की पेशकश की है, जो दर्शाता है कि यह दोस्ती पारंपरिक और अटूट विश्वास पर आधारित है.