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मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर: बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति और उनके राजनीतिक सफर की कहानी

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को बांग्लादेश का नया राष्ट्रपति चुना गया है। उनकी जीत ने 35 वर्षों के बाद सीधे चुनावों में एक नया अध्याय खोला है। आलमगीर का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ और उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। जानें उनके परिवार, शिक्षा, और भारत से संबंध के बारे में, जो उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
 

बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति का चुनाव

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को बांग्लादेश का नया राष्ट्रपति चुना गया है। यह चुनाव 35 वर्षों के बाद सीधे तौर पर आयोजित किया गया, जिसमें आलमगीर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंद्वी सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद थे, जिन्हें जमात-ए-इस्लामी सहित 11 दलों का समर्थन प्राप्त था।


आलमगीर की जीत का आंकड़ा

आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद को केवल 88 वोट मिले। इस प्रकार, आलमगीर ने 167 मतों के अंतर से राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता। आइए जानते हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के बारे में और उनका भारत से क्या संबंध है?


राजनीतिक करियर की शुरुआत

आलमगीर ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत छात्र राजनीति से की। बीएनपी में शामिल होने से पहले, उन्होंने 1960 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान छात्र संघ में भाग लिया और 1969 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के खिलाफ विद्रोह में शामिल हुए, जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। बीएनपी में शामिल होने के बाद, आलमगीर का राजनीतिक करियर लगातार ऊंचाइयों की ओर बढ़ा।


शिक्षा और प्रशासनिक करियर

1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता के बाद, आलमगीर ने 1972 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और ढाका कॉलेज में प्रवक्ता बने। इसके बाद, उन्होंने निरीक्षण एवं लेखापरीक्षा निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में कार्य किया और बांग्लादेश के डिप्टी पीएम एसए बारी के निजी सचिव की भूमिका भी निभाई।


परिवार और राजनीतिक पृष्ठभूमि

आलमगीर एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रुहुल अमीन ठाकुरगांव से सांसद रहे और बांग्लादेश के कृषि मंत्री भी थे। उनके चाचा मिर्जा गुलाम हाफिज बांग्लादेश की दूसरी संसद के अध्यक्ष रहे हैं। आलमगीर के छोटे भाई मिर्जा फैसल अमीन भी राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं।


सियासत में कदम

आलमगीर ने 1986 में सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1988 में अपने गृहनगर ठाकुरगांव नगरपालिका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।


बीएनपी में महत्वपूर्ण पद

आलमगीर ने 1990 में बीएनपी में शामिल होकर 1992 में ठाकुरगांव बीएनपी जिलाध्यक्ष का पद संभाला। 2001 में उन्हें कृषि, नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्यभार सौंपा गया। 2016 में उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया, और वे पिछले 10 वर्षों से इस पद पर हैं।


भारत से संबंध

आलमगीर ने ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उनकी पत्नी आरा बेगम एक बीमा कंपनी में कार्यरत हैं और कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। उनके दो बेटियाँ हैं, जिनमें से एक ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही है और दूसरी एक स्कूल शिक्षक है। 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान आलमगीर ने कुछ समय भारत में शरण ली थी।