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मिस्र में स्वतंत्र न्यूज पोर्टल 'मदा मस्र' पर अदालत का बड़ा फैसला

मिस्र की अदालत ने स्वतंत्र न्यूज पोर्टल 'मदा मस्र' को बंद करने का आदेश दिया है, जिससे प्रेस की स्वतंत्रता को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इसकी संस्थापक लीना अत्ताल्लाह पर बिना लाइसेंस वेबसाइट चलाने का आरोप लगाया और उन पर भारी जुर्माना लगाया। मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की निंदा की है, जबकि मदा मस्र ने अधिकारियों पर जवाब न देने का आरोप लगाया है। यह मामला स्वतंत्र पत्रकारिता पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
 

मिस्र की अदालत का आदेश

मिस्र की न्यायालय ने स्वतंत्र समाचार पोर्टल 'मदा मस्र' को बंद करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इसकी संस्थापक और संपादक लीना अत्ताल्लाह को बिना लाइसेंस के वेबसाइट चलाने का दोषी पाया है। उन पर लगभग 53,400 अमेरिकी डॉलर का भारी जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा है कि जब तक लीना अत्ताल्लाह जुर्माना नहीं चुकातीं, तब तक उन्हें हिरासत में रखा जाएगा।


प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रभाव

'मदा मस्र' उन कुछ समाचार माध्यमों में से एक है, जो भ्रष्टाचार, सेना की बढ़ती भूमिका और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे मुद्दों पर रिपोर्टिंग करता है। मिस्र में समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर सरकारी नियंत्रण बहुत कड़ा है। इस निर्णय को प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।


मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता पर और अधिक दबाव डालेगा। मदा मस्र के वकील हसन अल-अजहरी ने कहा है कि वे इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगे। ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस मामले को स्वतंत्र मीडिया पर हमलों में वृद्धि के रूप में देखा है।


मदा मस्र का पक्ष

मदा मस्र ने बताया कि उसने 2018 में वेबसाइट का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन अधिकारियों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बावजूद, 2017 से इसकी वेबसाइट को ब्लॉक किया गया है। पिछले छह वर्षों में यह उनके खिलाफ या उनके पत्रकारों पर छठा मामला है।


स्वतंत्र पत्रकारों पर कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब मिस्र में स्वतंत्र पत्रकारों पर कार्रवाई की गई है। हाल ही में, सुरक्षा बलों ने खोजी पत्रकारिता से जुड़े एक प्लेटफॉर्म के छह पत्रकारों को गिरफ्तार किया था। उन पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने और झूठी खबरें फैलाने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की 2026 की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में मिस्र 180 देशों में 169वें स्थान पर है।