यमन के गृहयुद्ध में मारिब का महत्व: हूती विद्रोहियों का नया हमला
यमन के गृहयुद्ध का नया मोड़
नई दिल्ली: यमन के गृहयुद्ध ने एक ऐसा मोड़ लिया है, जहां केवल भूभाग नहीं, बल्कि पूरे देश का आर्थिक और राजनीतिक भविष्य दांव पर है। हूती विद्रोहियों ने पश्चिमी तट से लेकर लाल सागर तक अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और अब उनकी नजरें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मारिब शहर पर हैं। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार, जो पहले खोए हुए क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रही थी, अब अपनी रणनीति में बदलाव कर मुख्य रक्षात्मक मोड में आ गई है। राजधानी सना से केवल 120 किलोमीटर दूर स्थित मारिब को बचाना अब सरकार के लिए प्रतिष्ठा और अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।
मारिब: सरकार का अंतिम गढ़
मारिब यमन की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां के बड़े गैस भंडार, तेल क्षेत्रों और प्रमुख पावर स्टेशनों के कारण यह सरकार की आय का एक बड़ा स्रोत है। यदि यह क्षेत्र खो जाता है, तो यमन सरकार की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित होगी। इसके अलावा, मारिब में यमन सेना के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने हैं और यह सऊदी अरब के अल-वादिया बॉर्डर क्रॉसिंग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उत्तरी यमन में यह सेना का अंतिम बड़ा गढ़ है, जिसे बचाने के लिए सऊदी अरब के हवाई हमलों का सहारा लिया जा रहा है।
बढ़ते दबाव और संघर्ष
हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, हूतियों ने इस क्षेत्र में अपने नए लड़ाकों की तैनाती और भारी सैन्य सामग्री की आपूर्ति में वृद्धि की है। अल-मखा और ताइज के तटीय क्षेत्रों से पीछे हटने के बाद यमनी बलों को पहले से ही अंदाजा था कि अगला बड़ा हमला मारिब पर होगा। यह संघर्ष केवल एक मोर्चे तक सीमित नहीं है; लाहज, अल-जौफ और धालेआ जैसे क्षेत्रों में भी लगातार खूनी झड़पें हो रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में विभिन्न मोर्चों पर हुई भारी गोलाबारी और झड़पों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और लगभग 880 से अधिक नागरिक और सैनिक घायल हुए हैं। इसके अलावा, पश्चिमी रिपोर्टों और खुफिया दावों के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा हूतियों को हथियारों और रणनीतिक सहायता लगातार दी जा रही है।
मारिब का पतन: वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव
यदि हूती विद्रोही मारिब के बाहरी इलाकों को भेदकर शहर पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं, तो इसका प्रभाव केवल यमन तक सीमित नहीं रहेगा। मारिब का पतन यह संकेत देगा कि हूती लड़ाके सऊदी अरब की सीमा के और करीब पहुंच जाएंगे और उत्तरी यमन पर उनका एकछत्र राज स्थापित हो जाएगा। पश्चिमी तट और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर हूतियों की बढ़ती उपस्थिति पहले से ही लाल सागर के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है। ऐसे में, मारिब का हूतियों के हाथों में जाना सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और लाल सागर के व्यापारिक गलियारों पर ईरान समर्थित लड़ाकों के प्रभाव को और मजबूत करेगा।