यमन के हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब पर बढ़ता दबाव: क्या है स्थिति?
सऊदी अरब में सुरक्षा संकट
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को नई चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है। लगातार हो रहे मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमलों के कारण सऊदी अरब की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए सऊदी प्रशासन ने मक्का अल-मुकर्रमा, ताइफ और जेद्दा जैसे प्रमुख शहरों में आपातकालीन अलर्ट जारी किया है। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने, इमारतों के अंदर रहने और खिड़कियों, कांच, बालकनी तथा छतों से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है। इसके अलावा, जो लोग बाहर हैं, उन्हें नजदीकी मजबूत इमारतों में शरण लेने और पुलों व ऊंची संरचनाओं से दूर रहने का निर्देश दिया गया है।
सऊदी कैबिनेट की प्रतिक्रिया
सऊदी कैबिनेट की कड़ी निंदा
सुरक्षा के बढ़ते खतरे के बीच, सऊदी अरब की कैबिनेट ने एक विशेष बैठक में नागरिकों और नागरिक ठिकानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हूती विद्रोहियों का आक्रमण
تم إطلاق إنذار من المنصة الوطنية للإنذار المبكر في حالات الطوارئ في مدينة مكة المكرمة للتحذير من خطر، اتبع الآتي: pic.twitter.com/rmX6ip83oj
— الدفاع المدني السعودي (@SaudiDCD) September 15, 2026
सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिकों, विदेशी निवासियों और महत्वपूर्ण हितों की रक्षा का अधिकार बताया है।
खमीस मुशैत सैन्य अड्डे पर हूती हमले का दावा
युद्ध के मोर्चे पर हूती विद्रोहियों का हमला और भी आक्रामक होता जा रहा है। उन्होंने खमीस मुशैत स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य एयरबेस पर हमले का दावा किया है, जिसमें एयरक्राफ्ट हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के डिपो को निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन हमलों में कम से कम 13 आम नागरिक घायल हुए हैं।
समुद्री सुरक्षा संकट
लाल सागर में हूती विद्रोहियों का रणनीतिक कब्जा
यह सुरक्षा संकट केवल भूमि पर ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है। यमनी अधिकारियों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण पेरिम द्वीप और ग्रेटर तथा लेसर हनिश द्वीपों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। ये द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं, जहाँ से सऊदी अरब का प्रमुख एशियाई बाजारों के लिए समुद्री शिपिंग रूट गुजरता है। हूतियों की इस सैन्य बढ़त ने जिबूती में अमेरिकी सैन्य अड्डे से केवल 32 किलोमीटर की दूरी तक उनकी उपस्थिति दर्ज कराई है।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहराया संकट
हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के तटीय क्षेत्रों और द्वीपों पर नियंत्रण मजबूत करने से वैश्विक व्यापार में संकट उत्पन्न हो गया है। जलडमरूमध्य के पास बढ़ते खतरे के कारण खाड़ी देशों ने ईरान के साथ प्रस्तावित महत्वपूर्ण वार्ता को टाल दिया है। इस निर्णय ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सैन्य घेराबंदी और मिसाइल हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।