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यमन में युद्धविराम का अंत: सऊदी अरब पर हुए हमलों के बाद भड़की सैन्य कार्रवाई

यमन में चार साल से चल रहा युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है, जिससे एक बार फिर भीषण सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है। सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों के बाद, यमनी सरकारी बलों ने जवाबी कार्रवाई की है। इस स्थिति ने न केवल स्थानीय स्तर पर तबाही का संकेत दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है। जानें इस संघर्ष के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव।
 

यमन में फिर से भड़की सैन्य टकराव की आग


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चार वर्षों से चल रहा नाजुक युद्धविराम अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, और यमन में एक बार फिर से भीषण सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है। सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों और नागरिक स्थलों पर हुए बड़े हूती हमलों के बाद, सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने व्यापक पलटवार किया है। बुधवार की सुबह, यमन के चार प्रमुख प्रांतों, ताइज, होदेदा, जौफ और मारिब में एक साथ 32 से अधिक हवाई हमले किए गए। यह अचानक सैन्य गतिविधि न केवल स्थानीय स्तर पर तबाही का संकेत दे रही है, बल्कि दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'बाब अल-मंदेब' के लिए भी गंभीर खतरा बन गई है।


यमनी सेना ने रणनीतिक चौकियों पर फिर से कब्जा किया

यमन में सेना और विद्रोहियों के बीच सीधी लड़ाई शुरू हो गई है। दक्षिणी मारिब, उत्तरी धले के मेरिस मोर्चे और पश्चिमी ताइज के तोइल-अल-बारा क्षेत्रों में भारी तोपखाने और वायु समर्थन के साथ सेना आगे बढ़ रही है।


सरकारी बलों ने ताइज के अल-कद्दाह मोर्चे पर कई गांवों और रणनीतिक पहाड़ियों पर फिर से नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। हेलन की पहाड़ियों पर हूती बंकरों पर किए गए भीषण हवाई हमलों ने विद्रोहियों को भारी जन-धन का नुकसान पहुंचाया है।


सऊदी ठिकानों पर हमलों के बाद भड़का जवाबी मोर्चा

यह नया संघर्ष तब शुरू हुआ जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी क्षेत्रों में कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इन हमलों में सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको के प्रतिष्ठानों सहित कई सार्वजनिक बिजली-पानी केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिससे कम से कम 73 लोग गंभीर रूप से घायल हुए और कई स्थानों पर भीषण आग लग गई। इसके तुरंत बाद, सऊदी समर्थित यमनी राष्ट्रीय सेना ने हूती नियंत्रित चार प्रांतों में भीषण बमबारी शुरू कर दी। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने हवाई हमलों के विवरण पर चुप्पी साधी हुई है, लेकिन हूती प्रवक्ता नसरुद्दीन आमेर ने इस हमले की पुष्टि की है।


वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों पर बढ़ता संकट

यमन का गृहयुद्ध लंबे समय से क्षेत्रीय शक्तियों के बीच 'प्रॉक्सी वॉर' बना हुआ है, लेकिन वर्तमान सैन्य गतिविधियाँ बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। यमन में अमेरिकी दूतावास ने सऊदी अरब के आत्मरक्षक अधिकारों का समर्थन किया है और हूतियों की आक्रामकता को इस स्थिति का जिम्मेदार ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने भी शांति प्रक्रिया के पटरी से उतरने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के कुल ऊर्जा कारोबार का पांचवां हिस्सा गुजरता है, वहां युद्ध के बादल गहराने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है।