यमन में हूती विद्रोहियों का बढ़ता प्रभाव: सऊदी अरब की सुरक्षा पर खतरा
हूती विद्रोहियों का नियंत्रण
यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग बाब अल मंदेब और मायन द्वीप पर अपने नियंत्रण को और मजबूत कर लिया है। सितंबर 2026 में किए गए इस अचानक हमले ने सऊदी अरब की लगभग एक दशक की सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक नीतियों को गंभीर चुनौती दी है। सऊदी अरब ने शुक्रवार रात और शनिवार सुबह रियाद सहित पूरे देश में आपातकालीन अलर्ट जारी किया और हवाई हमलों के खतरे की चेतावनी दी। राजधानी में कम से कम एक धमाके की आवाज सुनाई दी, जबकि ईरान ने इज़राइल के लिए जासूसी के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी देने की सूचना दी।
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
इस बीच, UN सुरक्षा परिषद ने हूती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों में वृद्धि की निंदा की, यह चेतावनी देते हुए कि इससे संघर्ष और बढ़ सकता है, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को खतरा हो सकता है, और यमन में शांति प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। परिषद ने सभी देशों से अपील की कि वे ईरान-समर्थित समूह को हथियार, प्रशिक्षण और अन्य सहायता देने से रोकें।
सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा
हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद, सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के सुरक्षित निर्यात के लिए पूरी तरह से लाल सागर के यनबू बंदरगाह और बाब अल मंदेब पर निर्भर हो गया है। सऊदी अरब का लगभग 80% तेल निर्यात एशियाई बाजारों की ओर जाता है। हूती विद्रोहियों ने इस स्थिति का लाभ उठाते हुए मोखा और दुबाब शहरों पर कब्जा कर लिया, जिससे सऊदी अरब की आर्थिक जीवन रेखा को सीधा खतरा उत्पन्न हुआ।
सऊदी अरब की कूटनीतिक चुनौतियाँ
सऊदी अरब की एक बड़ी कूटनीतिक कमजोरी यह रही है कि वह अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए हमेशा अमेरिका पर निर्भर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधे सैन्य हमले की मांग की थी, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया।