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यमन संकट: सऊदी अरब में अलर्ट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है, जहां यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब में इमरजेंसी अलर्ट के बाद नागरिकों में हड़कंप मच गया। ईरान में जासूसी के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी दी गई है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस संकट की निंदा की है, और भारत समेत अन्य देशों को इसके संभावित आर्थिक प्रभावों की चिंता है।
 

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक नए और गंभीर चरण में प्रवेश कर चुका है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हालिया संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह सऊदी अरब की राजधानी रियाद सहित कई क्षेत्रों में अचानक इमरजेंसी अलर्ट बजने लगे, जिससे नागरिकों में हड़कंप मच गया। सरकार ने 'दुश्मन के हवाई खतरे' की चेतावनी जारी की और रियाद में कम से कम एक जोरदार धमाका सुना गया। यमन में बढ़ते संकट ने न केवल मध्य पूर्व की शांति को खतरे में डाला है, बल्कि भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।


ईरान में जासूसी के आरोप में फांसी

ईरान में मोसाद के जासूस को फांसी


इस क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान से एक महत्वपूर्ण खबर आई है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में हुसैन पेद्रम को फांसी दी गई। उन पर इस्फहान के संवेदनशील सैन्य ठिकानों और मिसाइल अड्डों से संबंधित गोपनीय जानकारी इजरायल को देने का आरोप था। ईरान में बढ़ती फांसी की सजाओं पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।


सऊदी अरब में अलर्ट की स्थिति

सऊदी में अलर्ट से दहशत


हालांकि, राहत की बात यह है कि सऊदी अरब में अलर्ट वापस लिए जाने के बाद किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली। सऊदी अधिकारियों ने धमाकों की स्पष्ट वजह नहीं बताई, लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि यह हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइल या ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का परिणाम था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने शुक्रवार रात आपात बैठक की और सऊदी अरब तथा वाणिज्यिक जहाजों पर हूती हमलों की कड़ी निंदा की। सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देशों ने एकजुट होकर चेतावनी दी कि हूती विद्रोहियों की सैन्य बढ़त अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। परिषद ने सभी देशों से हूती समूह पर लगे हथियार प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने और उन्हें किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता न देने की अपील की है।


वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा


यमन संकट का यह नया विस्तार भारत के लिए अत्यंत चिंताजनक है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का यह मार्ग भारत के लिए यूरोप और पश्चिमी देशों के साथ समुद्री व्यापार का मुख्य रास्ता है। इस रूट पर हमलों के कारण जहाजों का किराया, बीमा लागत और माल पहुंचने का समय काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा, सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों में तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और उसकी कीमतों पर पड़ेगा। यही कारण है कि भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।