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यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के कारण और प्रभाव

यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी क्षेत्र में नई राजनीतिक गतिशीलता को जन्म दिया है। जहां यूएई ने इजरायल के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है, वहीं सऊदी अरब इस पर चिंतित है। ओपेक से यूएई की विदाई और इजरायल के साथ संभावित सैन्य समझौते ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जानें इस तनाव के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

यूएई की अलग दिशा

सऊदी अरब का प्रभाव खाड़ी के अधिकांश देशों पर स्पष्ट है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक अलग रास्ता अपनाया है। जहां रियाद ने इजरायल को मान्यता नहीं दी, वहीं यूएई ने न केवल इसे मान्यता दी, बल्कि इसके साथ अपने संबंधों को भी मजबूत किया है। इस बढ़ती नजदीकी से सऊदी अरब चिंतित है, और हाल के समय में दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा है.


यूएई की ओपेक से विदाई

यूएई ने सऊदी अरब के खिलाफ इजरायल के साथ खड़ा होना उचित समझा है, जो लीबिया, सूडान, यमन और सोमालिया तक फैला हुआ है। हाल ही में, यूएई ने ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकलने की घोषणा की, जिसे सऊदी अरब से जोड़ा जा रहा है। इस कदम से यूएई को अपने तेल उत्पादन में स्वतंत्रता मिली है.


सऊदी अरब का चेतावनी संदेश

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के मीडिया प्रमुख ने सोशल मीडिया पर ऊर्जा मंत्री अब्दुल अजीज बिन सलमान का एक पुराना वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि जो भी तेल बाजार में जोखिम उठाएगा, उसे गंभीर नुकसान होगा। यह स्पष्ट संदेश यूएई के लिए था.


अल्जीरिया का रुख

अल्जीरिया, जो ओपेक का हिस्सा है, ने यूएई के ओपेक छोड़ने को मामूली घटना बताया। राष्ट्रपति अब्देलमजीद तेब्बौने ने कहा कि रियाद और अबू धाबी के बीच दरार स्थायी है, और सऊदी अरब अभी भी समूह का मुख्य स्तंभ है.


इजरायल के साथ सैन्य समझौता

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी हमलों के बाद, यूएई इजरायल के साथ एक सैन्य समझौता करने की योजना बना रहा है, जिससे सऊदी अरब नाराज है। इजरायल ने यूएई और दुबई में अपने आयरन डोम सिस्टम को तैनात किया है, जो रॉकेट और ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है.


ईरान की भूमिका

यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते मतभेदों से ईरान भी अवगत है। हाल ही में, ईरान ने सऊदी अरब और ओमान को बताया कि वह यूएई को कमजोर करने की योजना बना रहा है। ईरान का मानना है कि यूएई की धरती से कई पड़ोसी देशों पर हमले किए गए हैं.


सूडान और लीबिया में मतभेद

यूएई और सऊदी अरब के बीच मतभेद सूडान तक फैले हुए हैं, जहां सऊदी अरब सूडानी सेना का समर्थन करता है, जबकि यूएई अर्धसैनिक बलों के पक्ष में है। लीबिया में, यूएई खलीफा हफ्तार का समर्थन करता है, जबकि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से हथियारों की खेप भेजने की योजना बनाई है.


यमन में स्थिति

यमन में, यूएई ने दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) का समर्थन किया, जिसने एक नए देश की स्थापना का सपना देखा। सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया है और यमन में अस्थिरता को अपने लिए खतरा मानता है.