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यूक्रेन में अमेरिकी F-16 जेट का गिरना: रूस ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका

यूक्रेन में अमेरिकी F-16 फाइटर जेट के गिरने की घटना ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। रूस ने इस जेट को अपने S300 एयर डिफेंस सिस्टम से गिराया, जिससे अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना न केवल यूक्रेन और रूस के बीच तनाव को बढ़ाती है, बल्कि अमेरिका, नाटो, पाकिस्तान और भारत जैसे देशों के लिए भी गंभीर चिंताएं पैदा करती है। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

यूक्रेन से आई चौंकाने वाली खबर

सच्चाई चाहे कितनी भी देर से सामने आए, लेकिन जब यह आती है, तो सबसे पहले भ्रम को तोड़ती है। आज यूक्रेन से एक ऐसी खबर आई है जो केवल यूक्रेन और रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, नाटो, पाकिस्तान और भारत को भी एक साथ सोचने पर मजबूर कर रही है। खबर यह है कि अमेरिकी निर्मित F-16 फाइटर जेट को रूसी S300 एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा गिरा दिया गया है। यह वही फाइटर जेट है जिसे वर्षों से गेम चेंजर और रूसी एयर डिफेंस ब्रेकर के रूप में देखा जा रहा था। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप उन हथियारों का डर दिखाकर कई देशों को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं, लेकिन अब वही हथियार उनकी बेइज्जती कर रहे हैं।


रूस का जवाब और अमेरिका की स्थिति

ट्रंप को यह झटका उस समय लगा है जब रूस ने एक टैंकर पर कब्जा करने के बाद अमेरिका से बदला लेने के लिए परमाणु हमले की धमकी दी है। खबरों के अनुसार, रूस ने उस F-16 फाइटर जेट को मार गिराया है जिसका उपयोग यूक्रेन की वायु सेना कर रही थी। यह जानकारी रूसी सरकारी मीडिया द्वारा दी गई है। रूसी सेना ने पुतिन के S300 एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से इस जेट को निशाना बनाया।


अमेरिका के लिए गंभीर संकेत

रूस ने अमेरिका के फाइटर जेट को गिराकर यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिमी देशों के हाईटेक फाइटर जेट भी रूसी एयर डिफेंस सिस्टम के सामने टिक नहीं पाते। यह वही F-16 जेट है जो पाकिस्तान के पास भी मौजूद है। पाकिस्तान के पास वर्तमान में 75 F-16 फाइटर जेट हैं, जो उसकी सैन्य शक्ति को बढ़ाते हैं। हालाँकि, 27 फरवरी 2019 को भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन ने अपने पुराने MG-21 से एक F-16 को मार गिराया था। अब रूस ने भी अमेरिका के इस फाइटर जेट को गिराकर ट्रंप की भारी बेइज्जती कर दी है।


यूक्रेन की स्थिति और भविष्य

यूक्रेन को अगस्त 2024 से अमेरिका और यूरोपीय देशों से F-16 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति शुरू होने वाली थी। इन विमानों को यूक्रेन की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत करने के लिए तैनात किया गया था। पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन को रूस के खिलाफ लड़ने के लिए F-16 दिए गए थे, जिससे उसकी हवाई सीमा को सुरक्षित और मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही थी।