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यूरोप में भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, फ्रांस में बढ़ी डूबने की घटनाएं

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जिससे फ्रांस में डूबने की घटनाएं बढ़ गई हैं। हाल ही में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक किशोरी भी शामिल है। सरकार ने आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं और सुरक्षा उपायों को लागू किया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस गर्मी के पीछे 'ओमेगा ब्लॉक' स्थिति है। जानें इस संकट के कारण और अन्य प्रभावित देशों के बारे में।
 

यूरोप में गर्मी का कहर

इस समय यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसका प्रभाव आम लोगों के जीवन पर गंभीरता से पड़ रहा है। हाल ही में फ्रांस में पिछले पांच दिनों में कम से कम 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, अधिकांश लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, झीलों और नहरों में तैरने गए थे, लेकिन सुरक्षा की कमी के कारण ये हादसे हुए।


सरकारी प्रतिक्रिया

फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने इन घटनाओं को 'दुखद अभिशाप' करार दिया है। बढ़ते हादसों को देखते हुए उन्होंने आपातकालीन मंत्रिमंडलीय बैठक बुलाई है। वहीं, युवाओं से जुड़े मामलों की मंत्री मरीना फेरारी ने चेतावनी दी है कि बिना निगरानी वाले जलाशयों में तैरना अत्यंत खतरनाक हो सकता है।


हादसों की गंभीरता

मृतकों में एक 13 वर्षीय किशोरी भी शामिल है, जो अपने परिवार के साथ सीन नदी में नहाने गई थी। बताया गया है कि उसे तैरना नहीं आता था। इसके अलावा, लियोन के पास रोन नदी से निकाले गए एक युवा फुटबॉल खिलाड़ी की हालत भी गंभीर बनी हुई है। दक्षिणी फ्रांस के कारपेंट्रास में दो छोटे बच्चों की भीषण मौत की खबर आई है, जो एक पारिवारिक वाहन के अंदर मृत पाए गए।


गर्मी की तीव्रता

फ्रांस ने इस वर्ष जून महीने का सबसे गर्म दिन और रात दर्ज की है। देश का औसत अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि न्यूनतम औसत तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा है। मौसम विभाग मेटियो-फ्रांस ने देश के आधे हिस्से में रेड अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


मौसमीय स्थिति

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस असामान्य गर्मी के पीछे 'ओमेगा ब्लॉक' नामक मौसमीय स्थिति जिम्मेदार है। यह स्थिति उच्च वायुदाब के क्षेत्र को लंबे समय तक एक स्थान पर बनाए रखती है, जिससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती। इसके परिणामस्वरूप तापमान लगातार बढ़ता है।


भविष्यवाणी

इस सप्ताह पेरिस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि मध्य फ्रांस के कुछ क्षेत्रों में 43 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ने की संभावना है। बेल्जियम के मौसम विभाग ने कहा है कि इस समय इतनी लंबी अवधि तक इतनी अधिक गर्मी पहले कभी नहीं देखी गई।


सरकारी उपाय

गर्मी के कारण फ्रांस में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एफिल टावर को समय से पहले बंद किया जा रहा है, और लौवर संग्रहालय के संचालन समय में भी बदलाव किया गया है। दक्षिण-पश्चिम फ्रांस के गोल्फेक परमाणु संयंत्र को नदी के पानी का तापमान कानूनी सीमा तक पहुंचने के बाद अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसके अलावा, सैकड़ों विद्यालय बंद कर दिए गए हैं और हजारों छात्रों को समय से पहले छुट्टी दी जा रही है।


अन्य प्रभावित देश

फ्रांस के अलावा, स्पेन, ब्रिटेन, बेल्जियम और इटली भी इस भीषण गर्मी से प्रभावित हैं। स्पेन के कई क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने भी अत्यधिक गर्मी के लिए दुर्लभ रेड चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसमीय पैटर्न के कारण यूरोप में इस तरह की चरम गर्मी की घटनाएं बढ़ रही हैं।