राजस्थान का थार रेगिस्तान: भारत की ऊर्जा सुरक्षा का नया केंद्र
भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियाँ
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। भारत अपनी आवश्यकताओं का 89% तेल विदेशों से आयात करता है, और यदि सप्लाई में रुकावट आई, तो देश की अर्थव्यवस्था ठहर सकती है। राजस्थान का थार रेगिस्तान, जो पहले जीवन के लिए कठिन माना जाता था, अब ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
राजस्थान में तेल के भंडार
राजस्थान के बाड़मेर क्षेत्र में 2004 में बड़े तेल भंडार का पता चला था, जिसे मंगला भाग्यम और ऐश्वर्या के नाम से जाना जाता है। यहां लगभग 1 बिलियन बैरल तेल का भंडार है, जिसमें से 500 मिलियन बैरल अब तक निकाले जा चुके हैं। यह क्षेत्र भारत के कुल घरेलू तेल उत्पादन का 20% योगदान देता है।
उत्पादन में वृद्धि की चुनौतियाँ
हालांकि, पुराने कुओं से तेल निकालना कठिन हो गया है, जिससे उत्पादन घटकर 51,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है। अब लक्ष्य इसे 80,000 बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाना है। इसके लिए भारत दो अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। पहली तकनीक एएसपी है, जिसमें विशेष रसायनों का उपयोग किया जाता है जो तेल की चिपचिपाहट को कम करते हैं।
नई रिफाइनरी का निर्माण
दूसरी तकनीक में गर्म भाप का उपयोग किया जाता है, जिससे तेल पिघलकर आसानी से निकाला जा सके। जैसलमेर में इस तकनीक का प्रयोग सफल रहा है, जिससे उत्पादन में 70% की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, बाड़मेर में एचपीसीएल द्वारा एक नई रिफाइनरी का निर्माण किया जा रहा है, जो राजस्थान के तेल को रिफाइन करने में मदद करेगी।