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रूस और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव: नया प्रतिबंध विधेयक क्या बदल सकता है?

अमेरिका ने रूस के खिलाफ एक नया प्रतिबंध विधेयक पारित किया है, जिससे मास्को और वाशिंगटन के बीच तनाव बढ़ गया है। इस विधेयक के तहत, राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति दी गई है, जो भारत और चीन की व्यापारिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। क्रेमलिन ने इस कदम की कड़ी निंदा की है, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इसका स्वागत किया है। जानें इस विधेयक के संभावित प्रभाव और भारत की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

अमेरिका का नया प्रतिबंध विधेयक


नई दिल्ली: रूस के खिलाफ अमेरिका द्वारा हाल ही में पारित नए प्रतिबंध विधेयक के बाद, मास्को और वाशिंगटन के बीच तनाव की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' को 262-159 के मतों से मंजूरी दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, रूस के क्रेमलिन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ऐसे कठोर कदम यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशों को और जटिल बना देंगे।


विधेयक का पारित होना

अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में इस विधेयक को 86-11 के बहुमत से पारित किया था। अब, प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के बाद, यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। यह कानून दिवंगत साउथ कैरोलिना के सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इस पर एक साल से अधिक समय तक काम किया। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद, उन्हें रूसी ऊर्जा के खरीदारों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की शक्ति प्राप्त होगी।


भारत और चीन पर 100% टैरिफ का खतरा

यह नया कानून मुख्य रूप से रूस के ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा प्रणाली, और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी अधिकारियों को लक्षित करता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने की अनुमति देता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन इस समय रूस के कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं, जिससे यह प्रावधान सीधे तौर पर नई दिल्ली और बीजिंग की व्यापारिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।


क्रेमलिन की प्रतिक्रिया

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस कदम को अमेरिका की 'अमित्रतापूर्ण कार्रवाई' बताया है। उन्होंने कहा कि मास्को पर आर्थिक दबाव डालने की अमेरिकी कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी, बल्कि यह शांति वार्ता को और भटका देगी। दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने इस विधेयक का स्वागत किया है। भारत के लिए यह 100% टैरिफ का खतरा उत्पन्न करता है, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र कदम उठाती रहेगी।