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रूस और चीन का अमेरिका के खिलाफ साझा मोर्चा: बीजिंग शिखर बैठक में महत्वपूर्ण समझौते

बीजिंग में आयोजित शिखर बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। दोनों नेताओं ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा में कदम उठाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नजदीकी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ एक साझा रणनीतिक गठबंधन का संकेत भी है।
 

बीजिंग में रूस-चीन शिखर बैठक

बीजिंग में आयोजित एक महत्वपूर्ण शिखर बैठक में, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। दोनों नेताओं ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कुछ देश पूरी दुनिया पर अपना वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ऐसी नीतियां अब विफल हो चुकी हैं। बिना सीधे नाम लिए, रूस और चीन ने अमेरिका की औपनिवेशिक सोच और एकतरफा दबाव की राजनीति को खतरे के रूप में बताया।


महत्वपूर्ण समझौते और सहयोग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के बाद, पुतिन भी शी जिनपिंग से मिलने के लिए चीन पहुंचे। इस बैठक में, दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय रणनीति से संबंधित बीस से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस बैठक का मुख्य संदेश यह था कि रूस और चीन अब पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ एकजुट होकर आगे बढ़ने की दिशा में हैं। संयुक्त घोषणा में, दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विखंडन और जंगल के कानून जैसी स्थिति लौटने के खतरे की बात की।


शी जिनपिंग और पुतिन का दृष्टिकोण

शी जिनपिंग ने अपने भाषण में कहा कि रूस और चीन को एकतरफा दबंगई और इतिहास को पीछे ले जाने वाली गतिविधियों का विरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश रणनीतिक स्तर पर और अधिक समन्वय बनाए रखेंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा तकनीकी नवाचार में सहयोग को बढ़ावा देंगे। पुतिन ने कहा कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिरता लाने वाली शक्तियां हैं और दोनों स्वतंत्र विदेश नीति के प्रति प्रतिबद्ध हैं।


प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना

बैठक के दौरान, रूस और चीन ने लंबे समय से अटकी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। साइबेरिया शक्ति दो नामक इस परियोजना के बारे में रूस के सरकारी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य समझ बन चुकी है, हालांकि कीमत और समयसीमा जैसे विषयों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। यह परियोजना रूस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों ने रूस के यूरोपीय ऊर्जा बाजार को कमजोर कर दिया है।


आर्थिक संबंधों की मजबूती

पुतिन ने कहा कि रूस चीन को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने के लिए तैयार है और दोनों देशों के आर्थिक संबंध अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि रूस और चीन के बीच अधिकांश व्यापारिक लेनदेन अब रूबल और युआन में हो रहा है, जिसे अमेरिका के प्रभाव वाले वैश्विक वित्तीय ढांचे को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और नई तकनीकों में भी सहयोग की बात की।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन की यह नजदीकी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के खिलाफ एक साझा रणनीतिक गठबंधन का संकेत भी है। चीन जहां रूस के साथ खड़ा दिखना चाहता है, वहीं वह पश्चिम से टकराव की स्थिति से भी बचना चाहता है। बीजिंग में हुई इस शिखर बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देश अब वैश्विक राजनीति में अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने के लिए संगठित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।


बैठक का समापन

बैठक के दौरान दोनों नेताओं का भव्य स्वागत किया गया। सम्मान गारद और तोपों की सलामी के बीच, दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर अपने मजबूत रिश्तों का संदेश दिया। हालांकि, किसी भी नेता ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन संयुक्त बयान और समझौतों ने यह स्पष्ट कर दिया कि रूस और चीन आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में साझा मोर्चे के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहते हैं।