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रूस और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव: यूक्रेन पर संभावित हमले की तैयारी

रूस और यूरोप के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर यूक्रेन के संदर्भ में। रूस ने एक नया सैन्य प्लान तैयार किया है, जिससे ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है। यूक्रेन ने रूस के हमलों का सामना करने के लिए नाटो देशों से मदद मांगी है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और कैसे यह यूरोप की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
 

रूस का नया सैन्य प्लान

यूरोपीय देशों के साथ रूस का टकराव तेजी से बढ़ रहा है। नए साल में रूस ने एक रणनीति तैयार की है, जिससे यूरोप में हड़कंप मच गया है। विशेष रूप से ब्रिटेन चिंतित है, क्योंकि रूस समुद्र के नीचे हमले की योजना बना सकता है। इस रिपोर्ट में हम रूस के इस नए प्लान को विस्तार से समझाते हैं। यूक्रेन ने रूसी क्रिसमस पर हमले कर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। यूक्रेन अब हार मानने को तैयार नहीं है और न ही वह एक इंच भूमि रूस को देने का इरादा रखता है, क्योंकि नाटो देशों ने हथियारों का उत्पादन बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, यूक्रेन में सैनिकों की तैनाती भी की जा रही है। ब्रिटेन ने युद्ध की योजना बनाई है, जिससे रूस को संघर्ष में उलझाया जा सके।


हाइब्रिड युद्ध की तैयारी

रूस अब हाइब्रिड युद्ध की तैयारी कर रहा है। इसके लिए दो स्तरों पर योजना बनाई गई है। ड्रोन वॉल बनाई जा रही है, जिससे रूस की ड्रोन घुसपैठ को रोका जा सके। इस कार्य में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी मिलकर योजना बना रहे हैं। रूस को यह समझ में आ गया है कि केवल यूक्रेन ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप के साथ टकराव बढ़ रहा है। एक ओर, समुद्र में इंटरनेट केबल काटने की योजना है, वहीं पावर सप्लाई केबल भी काटे जाएंगे। इसके अलावा, गैस पाइपलाइन को भी नष्ट किया जाएगा, जिससे यूरोपीय देशों में अंधेरा छा जाएगा और इंटरनेट के माध्यम से रूस के हमले को रोकना मुश्किल हो जाएगा।


यूक्रेन की सुरक्षा की चिंता

नाटो देशों को अब अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस समय रूस एक अंतिम हमले की योजना बना सकता है, जिससे यूक्रेन को तबाह किया जा सके। यूक्रेन ने इस खतरे के बारे में नाटो देशों से मदद मांगी है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि रूस के हमले बढ़ते जा रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि यूरोप के साथी इस पर ठोस कदम उठाएंगे। जेलेंस्की को यह भी समझ में आ गया है कि यदि यूरोपीय देशों ने अमेरिका की तरह पीछे हटने का निर्णय लिया, तो यूक्रेन कुछ ही दिनों में कमजोर हो जाएगा।