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रूस के यूक्रेन में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले को युद्ध अपराध माना गया

संयुक्त राष्ट्र की एक जांच ने रूस के यूक्रेन में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमलों को युद्ध अपराध के रूप में वर्गीकृत किया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन हमलों के कारण लाखों नागरिक ठंड और अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। आयोग ने रूस द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के सबूत भी पेश किए हैं, जिसमें भारत सहित 29 देशों के नागरिकों को भर्ती करने का मामला शामिल है। जानें इस रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष और रूस की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

रूस के हमलों का गंभीर प्रभाव

संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित एक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि रूस ने जानबूझकर यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग कड़ाके की ठंड में बिजली और हीटिंग के बिना रहने को मजबूर हो गए। यह कार्रवाई युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आती है। जांच में यह भी पाया गया कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए, भारत समेत 29 देशों के नागरिकों को धोखे या दबाव के माध्यम से अपनी सेना में भर्ती किया, ताकि वे यूक्रेन में लड़ सकें। फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के तुरंत बाद, जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक स्वतंत्र जांच आयोग का गठन किया था। सोमवार को इस आयोग की पहली रिपोर्ट, जो यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर रूस के हमलों के प्रभाव पर केंद्रित थी, संयुक्त राष्ट्र महासभा की मानवाधिकार समिति को प्रस्तुत की गई।


आम नागरिकों पर हमलों का प्रभाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली कटौती के कारण लाखों नागरिक अंधेरे और ठंड में रहने को मजबूर हुए। मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान, बुजुर्गों को आश्रयों तक पहुंचने में कठिनाई हुई, जबकि अस्पतालों में मरीजों को जीवन रक्षक उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ा। आयोग के अध्यक्ष एरिक मोसे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि ये जानबूझकर आम नागरिकों की सुविधाओं को निशाना बनाकर किए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि ये हमले 'मानवता के खिलाफ अपराध' हैं, क्योंकि इससे आम नागरिकों को गंभीर पीड़ा झेलनी पड़ी। नॉर्वे के पूर्व जज मोसे ने चेतावनी दी कि सर्दियों से पहले हमलों का बढ़ना आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।


आयोग के निष्कर्ष और रूस की प्रतिक्रिया

आयोग ने बताया कि उसके निष्कर्ष 255 यूक्रेनियनों के बयानों पर आधारित हैं, जिन्होंने 2025-26 में कीव और अन्य क्षेत्रों में सर्दियों की कठिनाइयों का सामना किया। इसमें सरकारी अधिकारियों, चिकित्सकों और नागरिक संगठनों से प्राप्त जानकारी भी शामिल है। मोसे ने कहा कि रूस ने आयोग की किसी भी रिपोर्ट पर टिप्पणी करने के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया है। सोमवार को, संयुक्त राष्ट्र में रूस के मिशन ने कहा कि वह आयोग के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देता और दावा किया कि इसके निष्कर्ष गलत आंकड़ों पर आधारित हैं। युद्ध के दौरान, रूस का कहना रहा है कि उसकी सेना केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाती है, जबकि कई रिपोर्टें इसके विपरीत संकेत देती हैं।