रूस-जर्मनी के बीच यूएन महासभा में बढ़ते तनाव की कहानी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में टकराव
नई दिल्ली: हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में रूस और जर्मनी के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए। जर्मनी ने रूस से 'तनाव बढ़ाने के खतरनाक रास्ते' से हटने की अपील की, जिसे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। लावरोव ने जर्मनी पर आरोप लगाया कि बर्लिन यूक्रेन को सबसे अधिक समर्थन देने वाला देश है और यूरोप में एक प्रमुख सैन्य शक्ति बनने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या जर्मनी को अपने कदमों के परिणामों का अंदाजा है और क्या उसने दूसरे विश्व युद्ध से कोई सीख नहीं ली है।
पहली बार आमने-सामने
यह पहली बार है जब 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्री आमने-सामने आए। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल की पहल पर हुई इस मुलाकात को लावरोव ने निरर्थक बताते हुए कहा कि जर्मन मंत्री ने केवल रूस पर पुरानी आलोचनाएं दोहराई।
सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पर विवाद
इस दौरान, लावरोव ने जापान के सैन्यवाद पर भी सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जर्मनी और जापान को स्थायी सदस्यता देने की किसी भी कोशिश पर वीटो लगाएगा, क्योंकि दोनों देश दूसरे विश्व युद्ध में रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के खिलाफ लड़े थे। जापान के उप राजदूत मिकानागी तोमोहिरो ने जवाब में कहा कि उनका देश शांति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर आधारित है।
यूक्रेन युद्ध पर रूस का पक्ष
लावरोव ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि वे रूस को सैन्य रूप से हराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसका परिणाम उनके लिए गतिरोध होगा। उन्होंने अगस्त 2025 में अलास्का में ट्रंप-पुतिन मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस उस समझौते पर लौटने के लिए तैयार है। वहीं, वाडेफुल ने रूस से यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की अपील की।