रूस-यूक्रेन युद्ध में मानवाधिकारों का उल्लंघन: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में मानवाधिकारों का उल्लंघन
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) द्वारा जारी की गई एक नई रिपोर्ट ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन और बर्बरता की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। यह रिपोर्ट फरवरी 2022 से जुलाई 2026 तक की अवधि को कवर करती है और इसमें यौन हिंसा के 1,004 प्रमाणित मामलों का विवरण दिया गया है। जांच में पाया गया है कि इन जघन्य अपराधों में से 89 प्रतिशत के लिए रूसी सेना, सुरक्षा बलों और जेल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि 11 प्रतिशत मामलों में यूक्रेनी अधिकारियों और सैन्यकर्मियों की संलिप्तता पाई गई है।
हिरासत केंद्रों में यौन प्रताड़ना का विवरण
रिपोर्ट में कब्जे वाले क्षेत्रों, सैन्य पूछताछ केंद्रों और जेलों में कैदियों के साथ हुए दुर्व्यवहार का दर्दनाक विवरण प्रस्तुत किया गया है। पीड़ितों के बयानों के अनुसार, गिरफ्तारी और पूछताछ के दौरान सामूहिक बलात्कार, जननांगों को नुकसान पहुंचाने और बिजली के झटके देने जैसे गंभीर हथकंडों का इस्तेमाल किया गया। पूछताछ के दौरान पुरुषों के जननांगों पर सोवियत काल के 'टैपिक' फील्ड टेलीफोन से करंट दिया जाता था।
हिरासत में पुरुषों की संख्या और पुनर्वास की आवश्यकता
युद्धकालीन यौन हिंसा में आमतौर पर महिलाओं और लड़कियों को मुख्य पीड़ित माना जाता है, लेकिन इस जांच में एक अलग पहलू सामने आया है। यूक्रेन में यूएन मानवाधिकार निगरानी मिशन की प्रमुख डेनियल बेल के अनुसार, हिरासत में यौन प्रताड़ना का शिकार होने वालों में पुरुषों की संख्या अधिक है, जिसमें युद्धबंदियों और असैन्य नागरिकों का समावेश है। इसके अलावा, कब्जे वाले क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों को भी इस तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों ने कहा है कि प्रभावित पुरुषों और महिलाओं के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास के लिए अलग-अलग रणनीतियों की आवश्यकता है।
रूसी रवैये पर सवाल और यूक्रेनी स्थिति
संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि रूस ने अपने कर्मियों द्वारा किए गए अपराधों की रोकथाम, जांच या दोषियों को सजा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है और न ही जांच टीम को सहायता प्रदान की है। रूस द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों में पहुंच न दिए जाने के कारण वास्तविक मामलों की संख्या दर्ज आंकड़ों से कहीं अधिक होने की संभावना है। दूसरी ओर, यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट का स्वागत करते हुए जांच का समर्थन किया है। हालांकि, रिपोर्ट में यूक्रेनी नियंत्रण वाले 10 आधिकारिक और 55 अनौपचारिक केंद्रों में भी रूसी युद्धबंदियों को दी गई यौन धमकियों और मारपीट का उल्लेख है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने रिपोर्ट में सामने आई क्रूरता पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि संघर्ष के माहौल में ये घटनाएं संभवतः अब भी जारी हैं। दर्ज आंकड़े वास्तविक स्थिति का केवल एक हिस्सा हैं, क्योंकि सामाजिक झिझक और सीमित पहुंच के कारण अनेक पीड़ित अपनी बात सामने नहीं रख पाते।