रूसी राष्ट्रपति पुतिन की चीन यात्रा: क्या कहेंगे शी जिनपिंग से?
पुतिन की चीन यात्रा का ऐलान
नई दिल्ली: क्रेमलिन ने शनिवार, 16 मई 2026 को यह जानकारी दी कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19 मई को चीन की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग से लौटने के तुरंत बाद हो रही है, जिन्होंने एक दशक में पहली बार राष्ट्रपति के रूप में चीन का दौरा किया।
शी जिनपिंग से मुलाकात
19 मई को जिनपिंग से मिलेंगे पुतिन
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्रेमलिन ने बताया कि पुतिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में दोनों नेता रूस और चीन के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक के अंत में एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके साथ ही, पुतिन चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मिलेंगे, जहां आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वर्तमान में, चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।
ट्रंप की यात्रा में ताइवान का मुद्दा
ट्रंप की यात्रा में छाया रहा ताइवान का मुद्दा
डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान ताइवान, व्यापार और ईरान संघर्ष जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। शी जिनपिंग ने ट्रंप को चेतावनी दी कि यदि ताइवान के मामले को गलत तरीके से संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है।
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में कहा कि उन्होंने अभी तक तय नहीं किया है कि ताइवान को बड़ा अमेरिकी हथियार पैकेज दिया जाए या नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि शी जिनपिंग के साथ ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, चीन इस बात पर सहमत है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज जलमार्ग खुला रहना चाहिए।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस-चीन संबंधों में मजबूती
यूक्रेन युद्ध के बाद और मजबूत हुए रूस-चीन संबंध
यह ध्यान देने योग्य है कि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के सैन्य अभियान के बाद से चीन और रूस के संबंध काफी मजबूत हुए हैं। बीजिंग लगातार शांति वार्ता की बात करता है, लेकिन उसने कभी रूस की आलोचना नहीं की। चीन खुद को तटस्थ बताता है और पश्चिमी देशों के आरोपों को खारिज करता है कि वह रूस को हथियार दे रहा है। इसके विपरीत, बीजिंग का कहना है कि पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियार देकर युद्ध को लंबा खींच रहे हैं।