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लाल किले पर आतंकवादी हमले के लिए AQIS को जिम्मेदार ठहराया गया

नयी दिल्ली में लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले के लिए अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) को जिम्मेदार ठहराया गया है। एक नई रिपोर्ट में इस हमले के पीछे के कारणों और आतंकवादी समूहों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि AQIS ने क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में खुद को विकसित किया है और बांग्लादेश में अपने समूह स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, रिपोर्ट में रासायनिक और जैविक हथियारों के विकास की दिशा में आतंकवादी समूहों की रुचि का भी उल्लेख किया गया है।
 

लाल किले पर हुए हमले की रिपोर्ट

नयी दिल्ली में पिछले साल नवंबर में लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले के लिए ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (एक्यूआईएस) को आधिकारिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। यह जानकारी आतंकवाद-रोधी प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक नई रिपोर्ट में दी गई है। इस हमले में लगभग 15 लोगों की जान गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।


यह विस्फोट लाल किला मेट्रो स्टेशन के निकट एक धीमी गति से चल रही कार में हुआ था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ‘एक्यूआईएस ने एक बिखरे हुए समूह से क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में खुद को विकसित करना जारी रखा है।’ सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को सौंपी गई विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी दल की 38वीं रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘एक्यूआईएस ने साजो-सामान और वित्तीय नेटवर्क स्थापित किए हैं और अब छोटे, विकेंद्रीकृत समूहों के रूप में काम कर रहा है।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘एक्यूआईएस ने बांग्लादेश में अपने समूह स्थापित करने के लिए वहां की परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की है।’


आतंकवादी समूहों की गतिविधियाँ

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अल-कायदा और आईएसआईएल (दाएश) रासायनिक और जैविक हथियार विकसित करने में रुचि रखते हैं, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण वे सफल नहीं हो पाए हैं। ऐसे हथियारों के विकास के निर्देश ऑनलाइन आतंकवादी समूहों में साझा किए गए हैं। उदाहरण के लिए, फरवरी में आईएसआईएल (दाएश) की अंग्रेजी पत्रिका ‘इनवेड’ में ‘बोटुलिनम टॉक्सिन’ और ‘सायनाइड’ बनाने के निर्देश शामिल थे।


इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान (आईएसआईएल-के) ने पिछले 12 महीनों में ‘राइसिन’ नामक जहरीले पदार्थ के विकास में विशेष रुचि दिखाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों ने 2025 के अंत में एक चिकित्सक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें विदेश में सक्रिय आईएसआईएल (दाएश) के एक समूह ने राइसिन विकसित करने का कार्य सौंपा था।


क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएँ

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमले जारी रहने के कारण दक्षिण एशिया में तनाव बना हुआ है। तालिबान ने बार-बार यह दावा किया है कि वह किसी आतंकवादी संगठन को पनाह नहीं दे रहा है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने चिंता जताई है कि संघर्ष की स्थिति आतंकवादी संगठनों के लिए अवसर पैदा कर सकती है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।


रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान से उत्पन्न आतंकवादी खतरा पहले जैसा ही बना हुआ है। कई आतंकवादी संगठन अफगानिस्तान में सक्रिय हैं, जो पड़ोसी देशों और मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं। अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद, आतंकवाद की समस्या को नियंत्रित करने में वे सफल नहीं हो पाए हैं।