लेबनान ने ईरानी राजदूत को किया निष्कासित, क्या बढ़ेगा तनाव?
लेबनान और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: लेबनान और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण दरार आ गई है। लेबनान सरकार ने ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी को 'पर्सोना नॉन ग्रेटा' घोषित कर दिया है, जिसका अर्थ है कि उन्हें अब लेबनान में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ रागी ने उन्हें 29 मार्च तक देश छोड़ने का आदेश दिया है। मंत्री ने यह जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। ईरानी चार्ज द'अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में बुलाकर यह निर्णय औपचारिक रूप से सूचित किया गया।
इजरायल का समर्थन
इजरायल ने किया फैसले का स्वागत
इजरायल ने लेबनान के इस निर्णय का समर्थन किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि यह कदम उचित है, क्योंकि ईरान लगातार लेबनान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। उन्होंने लेबनान को सलाह दी कि उसे हिज्बुल्लाह के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए, क्योंकि हिज्बुल्लाह के सदस्य अभी भी लेबनानी सरकार में शामिल हैं।
ईरान पर नए आरोप
ईरान पर नया आरोप
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने आरोप लगाया है कि ईरान ने लेबनान की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी, जिनमें से एक बेरूत में गिरी। IDF ने कहा, "ईरान किसी के नुकसान की परवाह नहीं करता।" इस घटना के बाद बेरूत के दक्षिणी क्षेत्रों में तनाव बढ़ गया है। इजरायली सेना ने वहां के निवासियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया है।
हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई
हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई जारी
इजरायली सेना ने बताया कि हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे। लेबनान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, एक विदेशी नौसेना द्वारा की गई मिसाइल इंटरसेप्शन का मलबा बेरूत के उत्तर में कई कस्बों पर गिरा, जिससे कुछ लोग हल्के रूप से घायल हो गए।
इजरायल ने यह भी दावा किया कि बेरूत के हज़्मिएह क्षेत्र में की गई कार्रवाई में ईरान की कुद्स फोर्स से जुड़े मोहम्मद अली कौरानी को मार गिराया गया। कुद्स फोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एक महत्वपूर्ण शाखा मानी जाती है।
दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण
दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण
ईरान लंबे समय से लेबनान में हिज्बुल्लाह के माध्यम से अपना प्रभाव बनाए हुए है। लेबनान सरकार का यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इस घटना पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।