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वेनेजुएला में भूकंप से पहले Google का अलर्ट: जानें कैसे काम करता है सिस्टम

वेनेजुएला में हाल ही में आए भूकंप के दौरान Google द्वारा भेजे गए अलर्ट ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। कई उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें भूकंप के झटके महसूस होने से पहले ही चेतावनी मिली थी। यह जानने के लिए कि Google का भूकंप अलर्ट सिस्टम कैसे काम करता है, पढ़ें कि कैसे स्मार्टफोन में लगे सेंसर भूकंप की प्रारंभिक तरंगों का पता लगाते हैं और लोगों को कुछ सेकंड पहले चेतावनी देते हैं। जानें इस तकनीक के पीछे का विज्ञान और इसके महत्व के बारे में।
 

भूकंप के बाद Google का अलर्ट

नई दिल्ली - हाल ही में वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दिया है। कई उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें भूकंप के झटके महसूस होने से पहले ही Google से चेतावनी मिली थी। इस दावे के साथ कई स्क्रीनशॉट भी साझा किए गए, जिससे लोगों में यह सवाल उठने लगा कि Google को भूकंप की जानकारी पहले कैसे मिल जाती है।


भूकंप की चेतावनी कैसे मिलती है?

वास्तव में, Google भविष्यवाणी नहीं करता, बल्कि Android Earthquake Alerts System का उपयोग करके भूकंप की प्रारंभिक तरंगों का पता लगाकर कुछ सेकंड पहले अलर्ट भेजने का प्रयास करता है। यह प्रणाली करोड़ों एंड्रॉयड स्मार्टफोनों में मौजूद सेंसर की मदद से कार्य करती है।


स्मार्टफोन कैसे बनता है भूकंप डिटेक्टर?

अधिकतर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) नामक सेंसर होता है। यह सामान्यतः फोन की स्क्रीन की दिशा बदलने और मूवमेंट पहचानने के लिए होता है, लेकिन यह जमीन में होने वाले प्रारंभिक कंपन को भी महसूस कर सकता है।


यदि किसी क्षेत्र में कई स्मार्टफोन एक साथ असामान्य कंपन का अनुभव करते हैं, तो वे गुमनाम रूप से Google के सर्वर को संकेत भेजते हैं। सर्वर विभिन्न उपकरणों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करता है और यदि भूकंप की पुष्टि होती है, तो प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को अलर्ट भेजा जाता है।


अलर्ट क्यों मिल जाता है कुछ सेकंड पहले?

भूकंप के दौरान सबसे पहले पी-वेव्स (P-Waves) निकलती हैं, जो अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाती हैं लेकिन तेज गति से यात्रा करती हैं। इसके बाद एस-वेव्स (S-Waves) आती हैं, जो अधिक तबाही मचाती हैं।


Android सिस्टम प्रारंभिक पी-वेव्स को पहचानकर तुरंत जानकारी सर्वर तक पहुंचाता है। इंटरनेट के माध्यम से यह सूचना तेजी से प्रसारित होती है, जिससे कई बार एस-वेव्स के पहुंचने से पहले ही आसपास के लोगों के मोबाइल पर चेतावनी मिल जाती है। हालांकि, यह समय कुछ सेकंड से लेकर कुछ दर्जन सेकंड तक हो सकता है और यह भूकंप के केंद्र से दूरी पर निर्भर करता है।


Google द्वारा भेजे जाने वाले अलर्ट

1. Be Aware Alert:
यह हल्के भूकंप या कम तीव्रता के झटकों के लिए भेजा जाता है, ताकि लोग सतर्क हो सकें।


2. Take Action Alert:
यह तेज और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले भूकंप के लिए जारी किया जाता है, जिसमें लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।


अलर्ट पर टैप करने पर उपयोगकर्ता को भूकंप की अनुमानित तीव्रता, केंद्र का स्थान, प्रभावित क्षेत्र का नक्शा और सुरक्षा संबंधी आवश्यक निर्देश भी दिखाई देते हैं।


भारत में भी उपलब्ध है यह सुविधा

Google का Android Earthquake Alerts System भारत में भी उपलब्ध है और यह Android 5.0 या उससे ऊपर के अधिकांश स्मार्टफोनों पर कार्य करता है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए फोन में इंटरनेट (मोबाइल डेटा या वाई-फाई) और लोकेशन सेवाएं सक्रिय होना आवश्यक हैं।


हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह तकनीक भूकंप की भविष्यवाणी नहीं करती, बल्कि भूकंप शुरू होने के बाद उसकी प्रारंभिक तरंगों का पता लगाकर लोगों को कुछ सेकंड पहले चेतावनी देने का प्रयास करती है। यही कुछ सेकंड आपदा के समय लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।