वेनेजुएला में मादुरो की सुरक्षा में चूक: अमेरिकी बलों ने किया गिरफ्तार
वेनेजुएला की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था की विफलता
नई दिल्ली: वेनेजुएला की राजधानी काराकस में राष्ट्रपति मिराफ्लोरेस पैलेस और उसके गुप्त बंकर अचानक सुनसान हो गए। अमेरिकी बलों ने निकोलस मादुरो को उनके निजी कक्ष से बाहर निकाला। यह चौंकाने वाला था कि 24 घंटे तैनात रहने वाले 2,000 से अधिक एलीट कमांडो के बावजूद कोई गोली नहीं चली। इस घटना ने मादुरो की सुरक्षा व्यवस्था और उनकी सत्ता की नींव को सवालों के घेरे में डाल दिया।
मादुरो की सुरक्षा व्यवस्था की विशेषताएँ
मादुरो की सुरक्षा व्यवस्था आम राष्ट्राध्यक्षों से भिन्न थी। गार्डिया डी ऑनर प्रेसिडेंशियल उनकी हर गतिविधि पर नजर रखती थी। सेना, वायुसेना और नौसेना से चुने गए एलीट कमांडो दिन-रात तैनात रहते थे। यह दावा किया गया था कि उनके बेडरूम में भी हवा की जांच की जाती है। लेकिन अमेरिकी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि कागजी सुरक्षा असली संकट में टिक नहीं पाती।
सुरक्षा घेरों की वास्तविकता
आउटर रिंग में मिलिट्री पुलिस और नेशनल गार्ड बाहरी खतरों को रोकने के लिए तैनात थे। मध्य रिंग में स्नाइपर्स, बम निरोधक दस्ते और एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल थे। इनर रिंग मादुरो का निजी क्षेत्र था, जहां स्थानीय सैनिकों की तुलना में क्यूबा की खुफिया एजेंसी के एजेंट अधिक थे। इन सभी इंतजामों के बावजूद, निर्णायक क्षण में सुरक्षा तंत्र निष्क्रिय नजर आया।
मादुरो की सतर्कता
अमेरिकी एजेंसियों से बचने के लिए मादुरो हमेशा सतर्क रहते थे। वे एक ही बिस्तर पर लगातार नहीं सोते थे और सुरक्षित स्थानों या अंडरग्राउंड बंकरों में रात बिताते थे। स्मार्टफोन का उपयोग छोड़कर, वे बर्नर फोन का सहारा लेते थे। ट्रैकिंग के डर ने उनकी दिनचर्या को प्रभावित किया। इसके बावजूद, उनकी लोकेशन तक पहुंच बनाना सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सुरक्षा तंत्र में अंदरूनी कमजोरी
सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी प्रतिरोध के गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि सुरक्षा तंत्र भीतर से कमजोर हो चुका था। आशंका है कि करीबी जनरलों ने मादुरो के खिलाफ साजिश की या सेना ने खुद को उनसे अलग कर लिया। पहरेदारों का मूकदर्शक बने रहना आदेश या सहमति का संकेत माना जा रहा है।
क्यूबा एजेंटों की निष्क्रियता
इनर सर्कल में मौजूद क्यूबा के एजेंट भी निर्णायक भूमिका नहीं निभा सके। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया या वे हथियार डालने के लिए मजबूर हुए। इसके साथ ही, उन्नत तकनीक के कारण रडार और संचार में बाधा आने की संभावना जताई गई है। नतीजतन, बंदूकें तनी रहीं और खेल खत्म हो गया। यह घटना दुनिया भर के नेताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी बन गई है।