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वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक बदलावों पर विदेश मंत्री जयशंकर की टिप्पणी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता को दुनिया की प्रमुख विशेषताएं बताया। इसके साथ ही, डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति के नए अवसरों पर भी चर्चा की। जानें कैसे ये बदलाव ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक सहयोग और आत्मनिर्भरता को प्रभावित कर सकते हैं।
 

वैश्विक अस्थिरता और अवसरों का नया परिदृश्य

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में हो रहे महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता अब दुनिया की प्रमुख विशेषताएं बन गई हैं। ब्रिक्स (BRICS) बिजनेस फोरम के दौरान जयशंकर ने बताया कि भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारियों और जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव स्पष्ट हो रहे हैं, जबकि तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति नए विकास के अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम ऐसे समय में हैं जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में भारी उथल-पुथल मची हुई है।"


डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति के अवसर

जयशंकर ने आगे कहा कि तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और तकनीकी विकास से विकास और उत्पादकता के नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि बदलते माहौल ने एक ऐसा आर्थिक परिदृश्य तैयार किया है जिसमें जोखिम और अवसर दोनों का विस्तार हो रहा है। विदेश मंत्री ने कहा, "इसका परिणाम यह है कि एक ऐसा आर्थिक परिदृश्य बन रहा है जिसमें पहले से अनुमान लगाने, हालात के अनुसार ढलने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।" ब्रिक्स बिजनेस फोरम, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी के लिए इस समूह का मुख्य मंच है, जो हर साल ब्रिक्स समिट से पहले आयोजित किया जाता है।


ब्रिक्स के लिए आर्थिक सहयोग की आवश्यकता

जयशंकर ने यह भी कहा कि देशों के बीच व्यापार के लिए अधिक साझेदार खोजना, नए बाजारों तक पहुंचना, सप्लाई नेटवर्क को जोड़ना और एक-दूसरे की क्षमताओं को व्यावसायिक साझेदारी में बदलना आवश्यक है। खासकर ब्रिक्स के लिए, अधिक आर्थिक गतिविधि और सुरक्षा का मतलब है आत्मनिर्भरता। उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे से जुड़े रहकर कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता को मजबूत करना होगा। इसके लिए सही बाजार प्रथाओं, विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स और पारदर्शी व्यापार की आवश्यकता है।


ब्रिक्स समिट की तैयारी

यह फोरम समूह की आर्थिक प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में योगदान देता है और नीति-निर्माताओं के साथ चर्चा का मंच प्रदान करता है। ब्रिक्स समिट का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर को शुरू होगा, जिसमें नेताओं के भारत की अध्यक्षता वाली पहलों और ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य ध्यान व्यापार, डिजिटल तकनीक, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन में सुधार पर है।