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शी जिनपिंग का ताइवान पर कड़ा संदेश: चीन की संप्रभुता के लिए कोई समझौता नहीं

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर एक बार फिर से सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इसे पार्टी का ऐतिहासिक मिशन बताया और कहा कि ताइवान को चीन में शामिल करना आवश्यक है। जिनपिंग ने अलगाववादियों को चेतावनी दी और बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करने की बात कही। इसके साथ ही, उन्होंने सेना को मजबूत बनाने और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जानें उनके भाषण के प्रमुख बिंदु और चीन की रणनीति क्या है।
 

चीन के राष्ट्रपति का ताइवान पर नया रुख


नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर एक बार फिर से सख्त रुख अपनाया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के 105वें स्थापना दिवस समारोह में, जिनपिंग ने स्पष्ट रूप से कहा कि ताइवान को चीन में शामिल करना पार्टी का ऐतिहासिक कार्य है। उन्होंने इसे CPC की 'अटल प्रतिबद्धता' बताया और कहा कि यह कार्य हर हाल में पूरा किया जाएगा।


अलगाववादियों को चेतावनी

अपने संबोधन में, जिनपिंग ने ताइवान की स्वतंत्रता की मांग करने वाले समूहों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चीन ऐसे सभी अलगाववादी तत्वों के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि नए हालात में ताइवान मुद्दे को सुलझाने की पार्टी की रणनीति को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि चीन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं करेगा। नेशनल यूनिफिकेशन का लक्ष्य निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।


मजबूत सेना की आवश्यकता

राष्ट्रपति जिनपिंग ने सेना को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि एक मजबूत देश के लिए एक शक्तिशाली सेना का होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, केवल एक शक्तिशाली सैन्य बल ही देश की सुरक्षा की गारंटी दे सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ताइवान स्ट्रेट में चीन की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं।


आर्थिक चुनौतियों का सामना

शी जिनपिंग ने स्वीकार किया कि चीन वर्तमान में ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां अवसरों के साथ-साथ जोखिम और चुनौतियां भी हैं। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे दुश्मन कितना भी शक्तिशाली हो, रास्ता कितना भी कठिन हो या चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, चीन पीछे नहीं हटेगा।


भ्रष्टाचार पर सख्ती

जिनपिंग ने पार्टी नेताओं से संकट की भावना को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बेहतर तालमेल बिठाकर उच्च गुणवत्ता वाले विकास पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए, जिनपिंग ने कहा कि पार्टी की शुद्धता और मजबूती को नुकसान पहुंचाने वाले सभी तत्वों को समाप्त किया जाएगा।