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शी जिनपिंग का भारत दौरा: ब्रिक्स सम्मेलन में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता

राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नई दिल्ली दौरा एशिया की दो प्रमुख शक्तियों के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता का अवसर प्रदान करता है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आए जिनपिंग के साथ एक प्रभावशाली प्रतिनिधिमंडल है, जो इस यात्रा की गंभीरता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स फ्रेमवर्क को नई ऊर्जा देने का एक बड़ा मौका है। जानें इस दौरे का वैश्विक स्तर पर क्या महत्व है और कैसे यह दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
 

शी जिनपिंग का नई दिल्ली आगमन

सात वर्षों का इंतजार खत्म हुआ और अब एशिया की दो प्रमुख शक्तियों का आमना-सामना होने जा रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँच चुके हैं, जहाँ उनका विमान पालम एयर बेस पर उतरा। चीनी प्रतिनिधिमंडल में कै ची (Cai Qi) और वांग यी (Wang Yi) शामिल हैं। कै ची, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना (CPC) की सेंट्रल कमिटी के पॉलिटिकल ब्यूरो की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं, जबकि वांग यी, CPC के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य और चीन के विदेश मंत्री हैं। इस बहुपरकारी मंच पर सभी की नजरें उस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली है। बीजिंग ने स्पष्ट किया है कि वह ब्रिक्स सहयोग को उच्च प्राथमिकता देता है।


चीन की गंभीरता और प्रतिनिधिमंडल की संरचना

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नई दिल्ली आए हैं। उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिकारियों की उपस्थिति इस यात्रा की गंभीरता को दर्शाती है। काई की, जो सीपीसी सेंट्रल कमेटी के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रभावशाली सदस्य हैं, और वांग यी, जो भारत-चीन मामलों के विशेषज्ञ हैं, इस बात का संकेत देते हैं कि नई दिल्ली में होने वाली बातचीत केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस और रणनीतिक निर्णयों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रिक्स के महत्व को उजागर किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच सहयोग का सबसे मजबूत मंच है।


मोदी-जिनपिंग की मुलाकात का महत्व

चीन इस मंच के माध्यम से ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत से दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स फ्रेमवर्क को नई ऊर्जा देने का अवसर मिलेगा। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के कार्यकारी निदेशक अतुल दलाकोटी ने कहा कि जब भी ये नेता मिलते हैं, परिणाम सकारात्मक होते हैं। भारत ने इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता का कार्य सफलतापूर्वक निभाया है, और अगले वर्ष यह जिम्मेदारी चीन के पास होगी। उन्होंने दो महत्वपूर्ण शर्तें भी रेखांकित की हैं: पहली, सीमा पर स्थायी शांति, और दूसरी, व्यापार में संतुलन। वर्तमान में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 155 अरब डॉलर है, जो संतुलित होने पर अगले 15 से 20 वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है।


ब्रिक्स के भविष्य पर प्रभाव

चीन स्थित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के शोधकर्ता वोंग यमिंग ने कहा कि चीन और भारत केवल पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि ब्रिक्स के संस्थापक स्तंभ भी हैं। दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों की दिशा का प्रभाव पूरे ब्रिक्स समूह के भविष्य और स्थिरता पर पड़ता है। उनका मानना है कि ब्रिक्स जैसे बहुपरकारी मंच दोनों देशों को आपसी मतभेद सुलझाने और संवाद का बेहतर माहौल बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। मजबूत संबंध ब्रिक्स जैसे संगठनों को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।