शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा: क्या बदलेंगे चीन-अमेरिका के रिश्ते?
नई दिल्ली में वैश्विक राजनीति की हलचल
नई दिल्ली: विश्व राजनीति में एक बार फिर से महत्वपूर्ण गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। आर्थिक शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव और कूटनीतिक रणनीतियों के बीच, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की तीन दिवसीय यात्रा पर वाशिंगटन पहुंचेंगे। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष निमंत्रण पर हो रही है और इसे दोनों देशों के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
व्यापारिक तनाव और टैरिफ पर चर्चा
दोनों देशों के उच्च स्तरीय राजनयिक और आर्थिक सलाहकार इस शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करने में लगे हुए हैं। इस वार्ता में व्यापार, सीमा शुल्क (टैरिफ) और आर्थिक संतुलन के मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे, तो उन्हें वैश्विक बाजार की स्थिरता और द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
एंड्रयूज एयरबेस पर स्वागत की तैयारी
एंड्रयूज एयरबेस पर अभूतपूर्व अगवानी की तैयारी
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, शी जिनपिंग 23 सितंबर को वाशिंगटन के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। खास बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप खुद एयरबेस पर जाकर चीनी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे। आमतौर पर, अमेरिकी राष्ट्रपति विदेशी नेताओं का स्वागत वाइट हाउस के ओवल ऑफिस में करते हैं। ट्रंप का यह कदम दोनों देशों के बीच संवाद को एक नई दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है।
यह मुलाकात मई 2026 में ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान शुरू हुई संबंधों को सुधारने की पहल को और मजबूत कर सकती है।
अमेरिका के नए प्रतिबंध और चीन की प्रतिक्रिया
यह ऐतिहासिक मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने हाल ही में 'लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026' को लागू किया है। इस कानून के तहत, रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन जैसे बड़े देश इस नीति के दायरे में आते हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि बीजिंग अपने व्यापारिक निर्णय समानता और संप्रभुता के आधार पर लेता है। चीन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तीसरे देश को दो राष्ट्रों के सामान्य आर्थिक लेन-देन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
चीन ने एकतरफा प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताया है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दायरे से बाहर लगाए जाते हैं।