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श्रीलंका के नेता ने भारत की सहायता की सराहना की

श्रीलंका के विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति की प्रशंसा की है, जो आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण साबित हुई है। उन्होंने भारत द्वारा प्रदान की गई सहायता की सराहना की, जिसमें 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की वित्तीय मदद शामिल है। प्रेमदासा ने कहा कि भारत की मदद केवल शब्दों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह वास्तविक कार्यवाही में तब्दील हुई। इस लेख में भारत-श्रीलंका संबंधों की गहराई और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है।
 

भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति का प्रभाव

श्रीलंका के विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति की प्रशंसा की है, यह कहते हुए कि इसने श्रीलंका के लिए महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं, खासकर आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं के समय।


कोलंबो में एक मीडिया चैनल से बात करते हुए, प्रेमदासा ने कहा कि भारत-श्रीलंका संबंधों को केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे साझा भूगोल, इतिहास, संस्कृति और आर्थिक भविष्य के साझेदारी के रूप में समझना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा भविष्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है," और यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।


भारत की सहायता की भूमिका

प्रेमदासा ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत की सहायता पर जोर दिया, जिसमें नई दिल्ली ने 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत की मदद केवल शब्दों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह वास्तविक कार्यवाही में तब्दील हुई।


आपदा राहत में भारत की तत्परता

चक्रवात दितवाह के बाद भारत की त्वरित प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए, प्रेमदासा ने वित्तीय सहायता और आपदा राहत संसाधनों के लिए भारत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने श्रीलंका की जरूरत के समय में तत्काल और प्रभावी सहायता प्रदान की।


भविष्य की संभावनाएं

2025 में द्विपक्षीय संबंधों पर विचार करते हुए, प्रेमदासा ने कहा कि दोनों देशों के संबंध कई चुनौतियों का सामना कर चुके हैं, लेकिन वे मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घनिष्ठ सहयोग दोनों देशों को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।