☰
×

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग फिर से उठ रही है, जिसमें रूस ने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। G4 और L69 समूहों के माध्यम से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। जानें कि कैसे UNSC की वर्तमान संरचना में बदलाव की आवश्यकता है और इसके पीछे के तर्क क्या हैं।
 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार का मुद्दा फिर से चर्चा में है। स्थायी और अस्थायी सदस्य देशों का मानना है कि बदलती भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण सदस्यता का दायरा बढ़ाना आवश्यक है। अब तक 100 से अधिक देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एकमत होकर कहा है कि UNSC की स्थायी संरचना में बदलाव होना चाहिए.


रूस का समर्थन

रूस ने एक बार फिर भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए दावेदारी का समर्थन किया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को महासभा के 81वें सत्र में कहा कि परिषद में सुधार के लिए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहिए, न कि पश्चिमी देशों को नई सीटें दी जानी चाहिए.


लावरोव का बयान

सर्गेई लावरोव, विदेश मंत्री, रूस:
हमारा सिद्धांत यह है कि UNSC के सुधार में पश्चिमी देशों, विशेषकर जर्मनी और जापान को कोई अतिरिक्त सीट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि ये देश सैन्यवाद और पुरानी नीतियों की वापसी के रास्ते पर हैं। हम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के पक्ष में हैं। हम भारत और ब्राजील की स्थायी सीट के लिए दावेदारी का समर्थन करते हैं। हमें अफ्रीकी महाद्वीप के हितों को भी ध्यान में रखना होगा.


G4 और L69 समूह

G4 देशों में ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान शामिल हैं, जो UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। वहीं, L69 विकासशील देशों का समूह है, जिसमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका-कैरेबियन, एशिया और प्रशांत महासागर के द्वीप विकासशील देश शामिल हैं.


UNSC की संरचना की समस्याएं

UNSC में वर्तमान में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के 5 स्थायी सदस्य हैं, जिनके पास वीटो पावर है। इन देशों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि परिषद में उनकी मनमानी चलती है. G4 को कुछ स्थायी सदस्यों का समर्थन मिला है, लेकिन इटली के नेतृत्व वाला 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' गठबंधन और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों का विरोध भी है.


स्थायी सीटों की मांग के आधार

UNSC में कुल 15 सीटें हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं। स्थायी सीटों के लिए किसी भी बदलाव के लिए महासभा में 2-तिहाई बहुमत और सभी 5 स्थायी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक है.


G4 और L69 की समानताएं

G4 और L69 दोनों ही UNSC को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। रूस जैसे देशों ने भारत, ब्राजील और अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है. दोनों समूह चाहते हैं कि पश्चिमी देशों को अतिरिक्त सीटें देने के बजाय एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को प्राथमिकता दी जाए.


मांगों का पूरा न होना

UNSC के ढांचे में बदलाव के लिए महासभा में 2-तिहाई बहुमत और सभी स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। किसी भी स्थायी सदस्य का वीटो पूरी प्रक्रिया को रोक सकता है, जो एक अलोकतांत्रिक ढांचा है. G4 और L69 जैसे समूहों में भी आपसी सहमति की कमी है, जिससे सुधार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है.