सऊदी अरब और इजरायल के बीच छिपे रिश्तों का रहस्य
सऊदी अरब की कठिनाइयाँ
सऊदी अरब, जो मध्य पूर्व का एक समृद्ध राष्ट्र है, वर्तमान में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना और लाल सागर की नाकेबंदी ने उसके तेल निर्यात को प्रभावित किया है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से ऊर्जा निर्यात पर निर्भर है। रियाद को अमेरिका, पाकिस्तान और तुर्की से अपेक्षित सैन्य सहायता भी नहीं मिल रही है। इस बीच, यह भी सुनने में आया है कि सऊदी अरब इजरायल को हूती विद्रोहियों के खिलाफ खुफिया जानकारी प्रदान कर रहा है, जबकि दोनों देशों के बीच कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इस घटनाक्रम को दुनिया ने अचरज से देखा, लेकिन सऊदी अरब ने इन दावों की पुष्टि या खंडन नहीं किया।
सऊदी अरब और इजरायल के बीच छिपे रिश्ते
मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच पर्दे के पीछे संबंध सामान्य हो रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब को एफ-35 फाइटर जेट बेचने के समय कहा था कि रियाद इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करेगा और अब्राहम समझौते में शामिल होगा। उस समय भी सऊदी अरब ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। हाल ही में फ्लाईदुबई की घटना ने इस संबंध की परतें खोल दी हैं।
फ्लाईदुबई की घटना
30 सितंबर को दुबई से इजरायल की राजधानी तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान को हाईजैक करने का प्रयास किया गया। ओमानी मूल के सह-पायलट ने मुख्य पायलट पर हमला कर विमान पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। हालांकि, कैप्टन स्मित की सूझबूझ और चार इजरायली यात्रियों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।
सऊदी अरब का सहयोग
इजरायली वायुसेना के जहाज के घेरने के बाद, फ्लाइट को जॉर्डन की सीमा से सऊदी अरब की ओर मोड़ा गया। विमान ने सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। आरोपी को-पायलट को गिरफ्तार कर लिया गया, और मुख्य पायलट को अस्पताल भेजा गया। हालांकि, इजरायल को जो सहयोग चाहिए था, रियाद ने उसकी अनुमति नहीं दी।
सऊदी अरब का व्यवहार
सऊदी अरब ने फ्लाईदुबई के यात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान की, लेकिन इजरायल के साथ सीधे सहयोग से बचा। रियाद का यह कदम न केवल इजरायल बल्कि वैश्विक विश्लेषकों के लिए भी आश्चर्य का कारण बना। सभी को लगा कि संकट के समय सऊदी अरब अलग तरीके से व्यवहार करेगा, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी।
इजरायल के प्रयास
फ्लाईदुबई की घटना के बाद, सभी यात्री डरे हुए थे और दोबारा फ्लाईदुबई से यात्रा नहीं करना चाहते थे। इजरायल ने अपने एयरफोर्स प्लेन भेजने की योजना बनाई, लेकिन सऊदी अरब ने इजरायली सैन्य जहाजों को उतरने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद इजरायल ने नागरिक विमान भेजने की पेशकश की, जिसे भी रियाद ने ठुकरा दिया।
मोसाद की चुनौती
इस घटनाक्रम के बीच, फ्लाईदुबई ने एक विमान सऊदी अरब भेजा, जिसमें सभी इजरायली यात्री सुरक्षित रूप से तेल अवीव पहुंचे। इजरायल का मानना था कि यह अधिक सुरक्षित विकल्प है। सऊदी अरब के इनकार के बाद, मोसाद को सक्रिय होना पड़ा और उसने जल्दी से फ्लाईदुबई की दूसरी उड़ान के पायलटों का सत्यापन किया।
सऊदी अरब की चुप्पी
सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने ओमानी पायलट से प्रारंभिक पूछताछ की, जबकि इजरायल ने घटना को तुरंत आतंकवाद से जोड़ना शुरू कर दिया। लेकिन रियाद ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि घटना के दो दिन बाद संयुक्त अरब अमीरात ने इसे आतंकवादी कृत्य बताया।
क्या रिश्ते सच में अच्छे हैं?
सऊदी अरब ने अपनी प्रारंभिक जांच से जुड़ी रिपोर्ट या जानकारी इजरायल को नहीं दी। इजरायल को सऊदी अरब में फ्लाइट के लैंडिंग के बाद की अधिकांश जानकारी अमेरिका और यूएई के माध्यम से मिली। रियाद का इजरायल को सहयोग न देना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, खासकर उस थ्योरी पर, जिसमें कहा गया है कि सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ इजरायल को खुफिया जानकारी दे रहा है।