☰
×

सऊदी अरब का ईरान के माध्यम से हूती विद्रोहियों को एक अरब डॉलर का प्रस्ताव

सऊदी अरब ने ईरान के माध्यम से हूती विद्रोहियों को एक अरब डॉलर की पेशकश की है, जिससे उसकी स्थिति और भी कमजोर होती जा रही है। प्रिंस खालिद बिन सलमान की ईरान यात्रा के दौरान सीजफायर को लेकर बातचीत की गई। रिपोर्टों के अनुसार, यह राशि तीन साल पहले की सहमति का हिस्सा हो सकती है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की कहानी और सऊदी अरब की कूटनीतिक चुनौतियाँ।
 

सऊदी अरब की बेबसी और ईरान के साथ बातचीत

हूती विद्रोहियों के हमलों के सामने सऊदी अरब की स्थिति कमजोर होती जा रही है। हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि रियाद ने ईरान के जरिए हूती विद्रोहियों को एक अरब डॉलर की पेशकश की है। यह रिपोर्ट इजरायल हायोम द्वारा मध्य-पूर्व में तैनात एक राजनयिक स्रोत के हवाले से प्रकाशित हुई है.


ईरान में सऊदी रक्षा मंत्री की यात्रा

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान अचानक ईरान पहुंचे। इस यात्रा के दौरान तुर्की और पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान के साथ बातचीत की गई, जिसका उद्देश्य हूती विद्रोहियों के साथ सीजफायर को सुनिश्चित करना था.


मिलिट्री एयरक्राफ्ट से भेजी गई रकम

सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खालिद सलमान अपने साथ हरक्यूलिस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में एक अरब डॉलर लेकर आए थे। यह राशि सीजफायर के बदले ट्रांसफर की जानी थी, लेकिन सऊदी अरब ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि क्या यह रकम भेजी गई.


क्या रियाद तीन साल पुराना पैसा चुका रहा है?

इजरायल हायोम के एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा विवाद का एक हिस्सा तीन साल पहले की सहमति से जुड़ा है, जिसमें सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों को पैसे देने थे। इसके बदले विद्रोहियों को सीजफायर बनाए रखना था. सऊदी अरब हमेशा से यह दावा करता आया है कि वह मिलिट्री ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा, लेकिन हाल की घटनाएं इसकी नीति पर सवाल उठाती हैं.


पाकिस्तान और तुर्की का रुख

सऊदी अरब से पहले, यूएई पर भी तेहरान को हमले के बदले 3 अरब डॉलर की रकम देने का आरोप लगाया गया था। सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्की से बड़ी उम्मीदें थीं, जिसके तहत मक्का समझौता किया गया था। हालांकि, इन देशों ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब का समर्थन नहीं किया। तुर्की और पाकिस्तान ने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान की कोशिश की है, और सऊदी रक्षा मंत्री का अचानक ईरान दौरा भी इसी का परिणाम है.