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सऊदी अरब का ईरान को आश्वासन: क्या मिडल ईस्ट में स्थिरता की नई उम्मीदें हैं?

सऊदी अरब ने ईरान को आश्वासन दिया है कि उसकी भूमि और एयरस्पेस का उपयोग किसी भी सैन्य हमले के लिए नहीं किया जाएगा। यह कदम शिया और सुन्नी देशों के बीच मतभेदों को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शांति का संकेत है। जानें इस स्थिति का मिडल ईस्ट पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

मिडल ईस्ट में नया मोड़


नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा ईरान को सैन्य हमलों की लगातार धमकियों के बीच, मिडल ईस्ट की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। सऊदी अरब ने ईरान को आश्वासन दिया है कि उसकी भूमि और हवाई क्षेत्र का उपयोग किसी भी हमले के लिए नहीं किया जाएगा। यह कदम शिया और सुन्नी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कुछ हद तक पीछे छोड़ते हुए क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।


सऊदी अरब का स्पष्ट संदेश

विशेषज्ञ इसे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शांति का संकेत मानते हैं। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में सहयोग नहीं करेगा, चाहे अमेरिका के ठिकाने सऊदी अरब में ही क्यों न हों।


ईरान के प्रति सऊदी अरब का आश्वासन


सऊदी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने मीडिया को बताया है कि हमने ईरान को स्पष्ट कर दिया है कि सऊदी अरब उसके खिलाफ किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके साथ ही, हम ईरान पर हमले के लिए अपनी भूमि और हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं होने देंगे।


शिया-सुन्नी विवाद के बीच एकता का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिया और सुन्नी देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही खाई को कुछ हद तक पाटने वाला संकेत है। अमेरिका के दबाव के बावजूद, सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य गठजोड़ का हिस्सा नहीं बनेगा। पाकिस्तान जैसे अन्य इस्लामिक देशों ने भी ईरान के समर्थन में कोई कदम नहीं उठाया है।


मिडल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव

मिडल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिनमें से कुछ सऊदी अरब में भी स्थित हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते, तेहरान ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब का ईरान को दिया गया यह आश्वासन क्षेत्रीय स्थिरता और युद्ध की आशंका को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संकेत देता है कि सऊदी अरब किसी भी अप्रिय सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी भूमि या हवाई क्षेत्र उपलब्ध नहीं कराएगा।