सऊदी अरब का कच्चे तेल निर्यात में बड़ा बदलाव: यूरोप को मिलेगी झटका
सऊदी अरब का नया कदम
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और रणनीतिक जलमार्गों में रुकावटों के चलते, सऊदी अरब ने कच्चे तेल के निर्यात में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। लाल सागर में पाइपलाइन पर हुए हमले और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, सऊदी अरब ने अपने पारंपरिक तेल निर्यात मार्गों में परिवर्तन किया है। इस निर्णय का सीधा प्रभाव यूरोपीय देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने अपने गल्फ पोर्ट रास तनूरा से लगभग 60 मिलियन बैरल कच्चे तेल को ओमान के सोहार पोर्ट की दिशा में मोड़ दिया है, जिसे जहाजों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाया जाएगा।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला
बंद हुई 1200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन
सऊदी अरब की 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर एक गंभीर ड्रोन हमले के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई है। यह पाइपलाइन खाड़ी के बंदरगाहों से कच्चे तेल को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती थी। हमले में मुख्य पंपिंग स्टेशन को भारी नुकसान हुआ है, जिसकी मरम्मत में लगभग पांच सप्ताह का समय लग सकता है। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है।
यूरोप में सप्लाई में कमी
यूरोप में सप्लाई कटी, एशिया की ओर बढ़ा रुझान
पाइपलाइन के अचानक बंद होने और यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के समुद्री मार्गों पर बढ़ते दबदबे के कारण, सऊदी अरब को अपने वैश्विक खरीदारों तक तेल पहुंचाने के लिए नए रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है। इस नए संकट के बीच, सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी 'अरामको' ने कम से कम दो प्रमुख यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को सूचित किया है कि उन्हें अगले महीने सऊदी से कच्चे तेल की डिलीवरी नहीं मिल सकेगी।
वहीं, ओमान के रास्ते भेजे जा रहे स्पॉट कार्गो को खरीदने में चीन और दक्षिण कोरिया की रिफाइनरियां आगे बढ़ रही हैं, जबकि कुछ सप्लाई भारत और जापान की ओर जाने की भी संभावना जताई जा रही है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के साथ जारी तनाव के कारण समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सऊदी अरब को अपना अधिकांश निर्यात दूसरी दिशाओं में स्थानांतरित करना पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
109 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति रुकने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। नॉर्वे की शोध फर्म 'रिस्टैड एनर्जी' के अनुसार, इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था। यदि आपूर्ति लंबे समय तक पूरी तरह ठप रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारी कमी हो सकती है। यही कारण है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 109 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो वैश्विक महंगाई और नए ऊर्जा संकट का स्पष्ट संकेत है।