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सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान की सेना की तैनाती: क्या है मक्का रक्षा समझौता?

सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच अपनी सैन्य कार्रवाई को तेज कर दिया है। इस संदर्भ में, पाकिस्तान अपनी सेना को सऊदी अरब में तैनात करने की योजना बना रहा है। मक्का रक्षा समझौते के तहत, तीन देशों ने सामूहिक सुरक्षा के लिए सहमति जताई है। जानें इस समझौते का महत्व और पाकिस्तान की संभावित भूमिका क्या होगी।
 

सऊदी अरब ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियाँ


नई दिल्ली: लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों में वृद्धि के चलते सऊदी अरब ने अपनी सैन्य कार्रवाई को तेज कर दिया है। यमनी सेना, जो सऊदी अरब के समर्थन में है, ने हूतियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस बीच, यह भी जानकारी मिली है कि पाकिस्तान अपनी सेना को सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए और तैनात करने की योजना बना रहा है।


सैन्य जुटाने की योजना

सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद नए मक्का रक्षा समझौते के तहत बड़े पैमाने पर सैन्य जुटाने की तैयारी कर रहा है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब सऊदी समर्थित यमनी सेना ने सऊदी एयरफोर्स की सहायता से बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास हूतियों पर जोरदार हमला किया। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है।


सैन्य और हथियारों की सहायता

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सऊदी अरब को सैनिकों के साथ-साथ हथियारों की भी सहायता प्रदान कर सकता है, क्योंकि हूती हमले लगातार बढ़ रहे हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि इस तैनाती में पाकिस्तान की थल सेना, वायु सेना और नौसेना के साथ-साथ मिसाइल और रॉकेट यूनिट भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि, कितने सैनिक भेजे जाएंगे और उनकी भूमिका क्या होगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।


यह निर्णय 5 अक्टूबर को रियाद में आयोजित मक्का रक्षा गठबंधन की आपात बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा समझौते को तुरंत लागू करने और सऊदी अरब में निर्धारित सैन्य बलों को जल्द भेजने पर सहमति जताई। संयुक्त बयान में सैनिकों की संख्या या हथियारों का उल्लेख नहीं किया गया।


पाकिस्तान की संभावित भूमिका

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना सऊदी क्षेत्र और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में मदद कर सकती है, जबकि पाकिस्तानी नौसेना लाल सागर और बाब अल-मंडेब के पास सऊदी हितों की रक्षा में तैनात हो सकती है। तोप, रॉकेट, ड्रोन और कम दूरी की मिसाइलें देने की भी चर्चा हो रही है। हालांकि, इस्लामाबाद और रियाद ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


यह भी बताया गया है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स सऊदी ऑपरेशन में सहायता कर सकती है, लेकिन यमन के अंदर हवाई हमलों में पाकिस्तान की सीधी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।


मक्का रक्षा समझौता

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता सामूहिक सुरक्षा का ढांचा प्रदान करता है, जिसके तहत एक सदस्य पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। अब तीनों देश इसे जमीनी सैन्य कार्रवाई में बदलने पर सहमत हो गए हैं।