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सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना के साथ मिलकर किया हमला

सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स पर हमला किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़ी चेतावनी दी। इस संघर्ष में कई लोग मारे गए हैं और इराक के पूर्व प्रधानमंत्री ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

सऊदी अरब का सक्रियता


नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति में, सऊदी अरब ने पहली बार खुलकर इस संघर्ष में भाग लिया है। उसने अमेरिकी सेना के साथ मिलकर ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) पर हमला किया है, जो इराक में हुआ। इस हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के चार सदस्य मारे गए हैं। यह जानकारी ईरानी मीडिया द्वारा दी गई है, जिसमें बताया गया है कि ये चारों लोग इराक में PMF के साथ मौजूद थे। हालांकि, इस पर अमेरिका, सऊदी अरब या इराक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


ईरान का जवाब

ईरान ने इस घटना पर बुधवार शाम तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया। दूसरी ओर, ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जोरदार जवाबी हमला किया। इसके बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए ईरानी मिसाइल हमले के बाद कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस हमले का कड़ा जवाब देगा और ईरान को सबक सिखाएगा।


ईरान ने मंगलवार रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों के पास मिसाइलों को रोकने के लिए केवल कुछ मिनट का समय था। उन्होंने इस कार्रवाई का वीडियो भी देखा।


क्षेत्र में बढ़ता तनाव

अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों के बाद, PMF ने बताया कि इन हमलों में उसके हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले में कम से कम 20 लोग मारे गए और 32 अन्य घायल हुए हैं। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पूर्व इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी ने इन हमलों की कड़ी निंदा की, इसे इराक की संप्रभुता का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया।