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सऊदी अरब पर ड्रोन हमले: मदीना से यानबू तक बढ़ता तनाव

मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जब सऊदी अरब के मदीना और यानबू में ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आईं। मदीना में एक पावर स्टेशन पर हुए हमले ने कई मुस्लिम देशों में आक्रोश पैदा किया, जबकि यानबू के अरामको टर्मिनल पर भी हवाई हमले की खबरें आई हैं। इन घटनाओं ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न की हैं। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और मुस्लिम देशों की प्रतिक्रियाएं।
 

सऊदी अरब के तेल उद्योग पर खतरा


नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर उभर आया है, और इस बार सऊदी अरब के तेल उद्योग को निशाना बनाया गया है। हाल ही में मदीना में पैगंबर की मस्जिद को बिजली देने वाले तैबा पावर स्टेशन पर ड्रोन हमले ने कई मुस्लिम देशों में आक्रोश पैदा किया। इसके बाद यानबू इंडस्ट्रियल पोर्ट पर अरामको के नॉर्थ टर्मिनल पर हवाई हमले और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, हालांकि इन घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।


यानबू, जो सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर लाल सागर के किनारे स्थित है, एक प्रमुख औद्योगिक और तेल निर्यात केंद्र है। यहां अरामको का नॉर्थ टर्मिनल प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल लोड करने की क्षमता रखता है। यह ध्यान देने योग्य है कि पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के माध्यम से यानबू तक पहुंचता है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बाधा आती है, तो यानबू सऊदी अरब के तेल निर्यात का वैकल्पिक मार्ग बन जाता है।


मदीना में पहला ड्रोन हमला

मदीना के पावर स्टेशन पर मंगलवार को हूती विद्रोहियों द्वारा ड्रोन हमले का आरोप सऊदी अरब ने लगाया था। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि ड्रोन के मलबे की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि इस हमले की योजना हूतियों ने बनाई थी। यह पावर स्टेशन मस्जिद-ए-नबवी और आसपास की नागरिक सुविधाओं को बिजली प्रदान करता है। हमले में एक ट्रांसफार्मर प्रभावित हुआ, लेकिन शहर की पूरी बिजली व्यवस्था पर असर नहीं पड़ा। हूतियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे सऊदी अरब की ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।


मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया

इस हमले के बाद यूएई, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने सख्त निंदा की, जबकि तुर्किये ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासेम अल-बुदैवी ने इसे गंभीर तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया और कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा सभी सदस्य देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यूएई ने इसे सऊदी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया, जबकि बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र से सख्त कार्रवाई की मांग की। यह मामला केवल एक बिजली स्टेशन का नहीं है, बल्कि मदीना के धार्मिक महत्व से भी जुड़ा है, जिससे इसका प्रभाव सऊदी सीमाओं से बाहर भी महसूस किया जा रहा है। इसी बीच, सऊदी गठबंधन ने दो बैलिस्टिक मिसाइलें और चार ड्रोन को मार गिराने का दावा भी किया है।