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सऊदी अरब में अरामको संयंत्र पर ड्रोन हमले से लगी भीषण आग, वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा

सऊदी अरब में अरामको के अबक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संयंत्र की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। सऊदी अधिकारियों ने इस हमले के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। इस घटना ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों को फिर से उजागर किया है।
 

सऊदी अरब में अरामको संयंत्र पर हमला

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के अबक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट और पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन पर ड्रोन हमले के कारण भयंकर आग लग गई है। नासा फर्म्स द्वारा प्रदान की गई सेटेलाइट तस्वीरों में संयंत्र के आस-पास व्यापक आग की लपटें दिखाई दे रही हैं, जिससे ऑयल सेंटर को गंभीर नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने अभी तक नुकसान का आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। इस घटना ने दुनिया के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह संयंत्र दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल स्टेबलाइजेशन प्लांट माना जाता है, जहां सऊदी अरब का अधिकांश कच्चा तेल निर्यात से पहले प्रोसेस किया जाता है। अनुमान है कि यह संयंत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 5 से 7 प्रतिशत हिस्सा प्रोसेस करता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।


हमले के संभावित परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संयंत्र की उत्पादन क्षमता लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन इराकी क्षेत्र से छोड़े गए थे और उनका उद्देश्य तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था। विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश अपनी सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए उचित जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही, इराक से अपने क्षेत्र का उपयोग ऐसे हमलों के लिए ना होने देने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई है।


क्षेत्र में बढ़ता तनाव

इस बीच, सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बना हुआ है। हूती विद्रोहियों ने पहले भी अरामको की अन्य सुविधाओं पर हमले किए हैं, जिससे आग लगने की घटनाएं हुई हैं। सऊदी की तेल रिफाइनरी अक्सर हूती विद्रोहियों या ईरान समर्थित अन्य समूहों के निशाने पर रहती है। सऊदी के एयर डिफेंस सिस्टम कई बार इन हमलों को रोकने में सफल होते हैं, लेकिन जब वे असफल होते हैं, तो यह गंभीर तबाही मचा सकते हैं। एक हमले से सऊदी की तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान हो सकता है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है और क्षेत्र की ऊर्जा संरचना पर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। अतीत में संयंत्र पर हुए हमलों का वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ा था, इसलिए यह घटना अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा क्षेत्र की नजर में आ गई है। फिलहाल, सऊदी अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने और नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं, जबकि निवेशक संभावित आपूर्ति रुकावट और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क हैं।