सऊदी अरब में मक्का और अन्य शहरों में इमरजेंसी अलर्ट जारी
सऊदी अरब में सुरक्षा अलर्ट
मंगलवार को सऊदी अरब में मक्का, जेद्दा और ताइफ जैसे क्षेत्रों में संभावित खतरों के मद्देनजर इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। यह कदम ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के पश्चिमी तट की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की खबरों के बाद उठाया गया। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई।
मक्का में अलर्ट का समय
सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा विभाग ने भारतीय समयानुसार दोपहर 2:48 बजे मक्का के लिए अलर्ट जारी किया। लोगों से कहा गया कि वे खुले और भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं। लगभग तीन घंटे बाद मक्का में खतरा टलने की सूचना दी गई, लेकिन लोगों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और घटना की तस्वीरें या वीडियो न बनाने की सलाह दी गई।
मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट
मक्का के लिए जारी किया गया यह अलर्ट विशेष रूप से चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में पहली बार है जब मक्का में हवाई खतरे के लिए इस तरह का इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। मक्का लाल सागर के तट से लगभग 70 किलोमीटर अंदर स्थित है और यह इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है।
जेद्दा और अन्य शहरों में चेतावनी
मंगलवार सुबह, सऊदी अरब के कई अन्य क्षेत्रों में भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए, जिनमें जेद्दा, ताइफ, अबहा, जिजान और अल-उला शामिल हैं। लाल सागर के तट पर स्थित यानबू के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल को भी अलर्ट वाले क्षेत्रों में रखा गया। यह घटनाक्रम हूतियों के पिछले हमलों के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और शहरों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में देश के दक्षिणी हिस्से में 13 लोग घायल हुए थे।
हूतियों की बढ़ती गतिविधियाँ
इस बीच, हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट और लाल सागर में कुछ रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने का दावा किया है, जिसमें मायून द्वीप भी शामिल है, जो बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के निकट महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में हूतियों की बढ़ती गतिविधियों ने समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में हूतियों की मजबूत होती पकड़ से लाल सागर के रास्ते होने वाले अंतरराष्ट्रीय कारोबार और जहाजों की आवाजाही पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।