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सऊदी अरब में मृत्युदंड की प्रक्रिया: विदेशी नागरिकों पर प्रभाव

सऊदी अरब में हाल ही में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद, इस देश की न्याय प्रणाली और विदेशी नागरिकों के लिए चुनौतियों पर चर्चा बढ़ गई है। सऊदी अरब की सख्त न्याय व्यवस्था और शरिया कानून के तहत, कई प्रवासी नागरिकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस लेख में, हम सऊदी अरब में मृत्युदंड की प्रक्रिया, इसके बढ़ते मामलों और विदेशी नागरिकों की स्थिति पर एक नज़र डालेंगे।
 

सऊदी अरब का हालिया निर्णय

दुनिया भर में सऊदी अरब के एक हालिया निर्णय की चर्चा हो रही है। 14 अक्टूबर को, इस देश ने दो बांग्लादेशी नागरिकों, एक पुरुष और एक महिला, को मौत की सजा सुनाई। उन पर आरोप था कि वे मस्जिद के अंदर अश्लील गतिविधियों में लिप्त थे। बांग्लादेश ने इस मामले में कहा है कि उसे इस निर्णय की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। सऊदी अरब की न्याय प्रणाली अपने कठोर और त्वरित निर्णयों के लिए जानी जाती है। शरीयत कानून के तहत, यहां मुकदमों की सुनवाई तेजी से होती है, जिससे आरोपियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। इस कारण, अन्य देशों की तुलना में यहां विदेशी नागरिकों के लिए मृत्युदंड की प्रक्रिया अधिक सख्त मानी जाती है।


मृत्युदंड के बढ़ते मामले

पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब में मृत्युदंड की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसे मानवाधिकार संगठनों ने चिंताजनक बताया है। 2025 में, सऊदी अरब ने 356 लोगों को मृत्युदंड दिया, जिनमें से 57% विदेशी नागरिक थे। यह पहली बार था जब सऊदी अरब में नागरिकों की तुलना में विदेशियों को अधिक फांसी दी गई।


विदेशियों के लिए चुनौतियाँ

सऊदी अरब में काम करने वाले कई प्रवासियों, विशेषकर भारत, पाकिस्तान, मिस्र और बांग्लादेश के नागरिकों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अरबी भाषा का ज्ञान न होना, सही अनुवादक की अनुपलब्धता और कानूनी सहायता की कमी के कारण विदेशी नागरिक अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाते। इसके अलावा, नशीली दवाओं की तस्करी के मामलों में जीरो-टॉलेरेंस नीति के कारण कई बार अनजाने में फंसे प्रवासियों को सीधे फांसी या सिर कलम करने की सजा मिल जाती है।


शरिया कानून का प्रभाव

सऊदी अरब की न्यायपालिका इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है, जिसमें अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ताज़ीर (Ta'zir) के तहत, सरकार या जज को अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा निर्धारित करने का अधिकार होता है। ड्रग तस्करी और मस्जिद में 'अनैतिक कृत्य' जैसे मामलों में सख्त सजा दी जाती है।


गोपनीय अदालती प्रक्रियाएँ

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सऊदी अरब में मृत्युदंड से संबंधित मामलों की सुनवाई अक्सर गोपनीय तरीके से होती है। कई बार कैदियों, उनके परिवारों या उनके देशों के दूतावासों को सजा के बारे में पहले से सूचित नहीं किया जाता। हाल ही में, दो बांग्लादेशी नागरिकों को दी गई सजा के मामले में भी ऐसा ही हुआ।


अन्य देशों की तुलना

यह ध्यान देने योग्य है कि केवल सऊदी अरब में ही विदेशी नागरिकों के लिए कठोर सजा का प्रावधान नहीं है। चीन में हर साल 1000 से अधिक लोगों को मौत की सजा दी जाती है, जबकि ईरान में भी फांसी की सजाएं अधिक होती हैं। इसके विपरीत, भारत और अमेरिका जैसे देशों में अपील और दया याचिका के कई स्तर होते हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति को तुरंत मृत्युदंड नहीं दिया जाता।