सेंट्रल अफ्रीकी रिपब्लिक में सोने की खदान ढही: 100 से अधिक लोगों की मौत
दर्दनाक हादसा: खदान ढहने से सैकड़ों की जान गई
नई दिल्ली: सेंट्रल अफ्रीकी रिपब्लिक से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है। मंगलवार की सुबह, देश के पश्चिमी क्षेत्र में एक सोने की खदान अचानक ढह गई, जिससे 100 से अधिक लोगों की जान चली गई। यह घटना अब्बा क्षेत्र में हुई, जहां श्रमिक खुदाई कर रहे थे।
शुरुआत में 30 लाशें, अब संख्या 100 के पार
स्थानीय प्रशासन और रेड क्रॉस ने इस हादसे की पुष्टि की है। प्रारंभ में यह जानकारी मिली थी कि लगभग 30 लोग मलबे में फंसे हैं, लेकिन जैसे-जैसे बचाव कार्य आगे बढ़ा, स्थिति और भी गंभीर होती गई। बुधवार तक, मलबे से 100 से अधिक शव निकाले जा चुके हैं।
बचावकर्मियों ने कई घंटों तक हाथों से मिट्टी और मलबा हटाकर शवों को बाहर निकाला। कुछ शव इतनी गहराई में थे कि उन्हें निकालने में काफी समय लगा। अधिकारियों को आशंका है कि अभी भी कई लोग खदान के अंदर फंसे हुए हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
बचाव कार्य में चुनौतियाँ: मशीनों की कमी
इस हादसे के बाद, बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती सामने आई है। मौके पर भारी मशीनों की अनुपस्थिति के कारण, स्थानीय लोग और बचावकर्मी हाथों से ही मिट्टी, पत्थर और मलबा हटा रहे हैं। खदान के अंदर पहुंचना बेहद कठिन है, क्योंकि सुरंगें संकरी और कमजोर हैं।
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अंदर फंसे लोगों के जीवित मिलने की संभावना भी कम होती जा रही है। प्रशासन और राहत टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं और लापता लोगों की खोज कर रही हैं। हादसे के कारणों की भी जांच की जा रही है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
यह बताया गया है कि यह एक आर्टिसनल यानी छोटे स्तर की सोने की खदान थी, जहां स्थानीय लोग साधारण औजारों से सोना निकालते हैं। सेंट्रल अफ्रीकी रिपब्लिक में हजारों परिवारों की आजीविका इसी प्रकार के छोटे खनन से चलती है।
इन खदानों में बड़ी कंपनियों जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। सुरंगों को मजबूत करने के लिए लकड़ी या लोहे के सपोर्ट नहीं लगाए जाते। बारिश या लगातार खुदाई से मिट्टी कमजोर हो जाती है और कभी भी भरभराकर गिर सकती है। यह हादसा भी इसी का परिणाम है। यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है।
अफ्रीका के कई देशों में सोने और हीरे की असुरक्षित खदानों में हर साल सैकड़ों मजदूरों की जान जाती है, लेकिन गरीबी के कारण लोग जान जोखिम में डालकर भी खदानों में उतरने को मजबूर हैं। इस घटना ने एक बार फिर छोटे स्तर के खनन में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।