हिंद महासागर में चीन की नई चुनौतियाँ: होर्मुज का बढ़ता खतरा
हिंद महासागर: व्यापार से रणनीतिक मुकाबले का मैदान
नई दिल्ली: हिंद महासागर अब केवल व्यापार का मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता जा रहा है। चीन ने लंबे समय तक माना कि उसकी समुद्री सुरक्षा की सबसे बड़ी कमजोरी मलक्का जलडमरूमध्य है, लेकिन एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने इस धारणा को बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, असली खतरा मलक्का से हजारों किलोमीटर दूर, ईरान के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से उत्पन्न होता है, जो चीन की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।
IISS की रिपोर्ट का महत्व
यह जानकारी लंदन स्थित सुरक्षा संस्थान इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की हालिया रिपोर्ट में दी गई है। यह रिपोर्ट सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला डायलॉग से पहले जारी की गई है, जिसका शीर्षक है “एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सुरक्षा मूल्यांकन।”
चीन की तेल निर्भरता
चीन, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, अपनी औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल पर निर्भर है। यह तेल मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आता है और समुद्री जहाजों के माध्यम से चीन तक पहुंचता है। इन जहाजों को सबसे पहले ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना होता है, जिसके बाद वे हिंद महासागर में प्रवेश करते हैं और अंततः मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंचते हैं।
मलक्का जलडमरूमध्य की नई स्थिति
अब तक, विशेषज्ञों का मानना था कि चीन की सबसे कमजोर कड़ी मलक्का जलडमरूमध्य है, लेकिन IISS की रिपोर्ट ने इस धारणा को चुनौती दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है या यह मार्ग बाधित होता है, तो तेल हिंद महासागर तक नहीं पहुंच पाएगा, जिससे मलक्का जलडमरूमध्य का महत्व भी समाप्त हो जाएगा।
सैन्य गतिविधियों में वृद्धि
रिपोर्ट में इस वर्ष हुए एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अभ्यास का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें चीन, रूस और ईरान ने मिलकर “समुद्री सुरक्षा बेल्ट 2026” नामक संयुक्त युद्धाभ्यास किया। इसके बाद ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया, जिसका प्रभाव समुद्री जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति पर पड़ा। यह दर्शाता है कि होर्मुज अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में से एक बन चुका है।
हिंद महासागर में प्रमुख शक्तियाँ
रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर में चार प्रमुख शक्तियाँ सक्रिय हैं: भारत, फ्रांस, अमेरिका और चीन। भारत इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता मानता है और पिछले कुछ वर्षों में उसने नौसैनिक अभ्यास बढ़ाए हैं। वहीं, अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा डिएगो गार्सिया द्वीप पर है, जो हिंद महासागर की गतिविधियों पर नजर रखता है।
चीन की रणनीति
चीन ने यह समझ लिया है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका, भारत और फ्रांस जैसी शक्तियों को चुनौती नहीं दे सकता। इसलिए, वह अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। चीन हिंद महासागर के आसपास के देशों में बंदरगाह, सड़क और बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है, साथ ही हथियारों की बिक्री और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।