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हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब पर ड्रोन हमला, मक्का रक्षा समझौते के बाद बढ़ा तनाव

हाल ही में, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जिजान में अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला करने का दावा किया है। यह हमला मक्का रक्षा समझौते के दो दिन बाद हुआ है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। सऊदी अरब ने आग पर काबू पाने की बात कही है, लेकिन किसी भी हमले की पुष्टि नहीं की है। क्या पाकिस्तान और तुर्की इस संघर्ष में शामिल होंगे? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

सऊदी अरब पर बड़ा हमला

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच मक्का रक्षा समझौते के दो दिन बाद, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर एक महत्वपूर्ण हमले का दावा किया है। हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने जानकारी दी कि सऊदी अरब के जिजान शहर में स्थित अरामको की रिफाइनरी को ड्रोन के माध्यम से निशाना बनाया गया।


सऊदी अरब का बयान

सऊदी अरब ने पुष्टि की है कि जिजान के अरामको प्लांट में लगी आग पर नियंत्रण पा लिया गया है और इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है। हूती विद्रोहियों ने यह भी बताया कि यमन के हज्जा और सादा प्रांत में सऊदी ड्रोन ने एयरस्पेस का उल्लंघन किया, जिसके जवाब में अरामको प्लांट पर हमला किया गया। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या समझौते के अनुसार पाकिस्तान और तुर्की इस संघर्ष में शामिल होंगे।


हूती विद्रोहियों का दावा

हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा, 'हमने ड्रोन से जिजान में अरामको रिफाइनरी को सटीकता से निशाना बनाया।' सऊदी अरब ने आग लगने की घटना को स्वीकार किया है, लेकिन किसी भी हमले की पुष्टि नहीं की है। 13 जुलाई को सना एयरपोर्ट पर बमबारी के बाद से हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ गया है।


सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी

20 जुलाई को, हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब की नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद से सऊदी अरब के स्वामित्व वाले कई तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं, जिससे लाल सागर में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है।


अल-मखा बंदरगाह पर हमला

पिछले हफ्ते, हूती विद्रोहियों ने यमन के अल-मखा बंदरगाह पर एक बड़ा हमला किया था, जिसमें बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन का उपयोग किया गया। अब खबरें आ रही हैं कि हूती विद्रोही अल-मखा बंदरगाह पर फिर से कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह सऊदी अरब के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक हार होगी, क्योंकि यह बंदरगाह लाल सागर और अरब सागर के समुद्री यातायात पर नजर रखने की क्षमता रखता है।