इथियोपिया की बोदी जनजाति: जहां मोटे शरीर को मिलता है सम्मान
बोधि जनजाति की अनोखी सोच
नई दिल्ली: दुनिया के अधिकांश हिस्सों में एक पतला और तंदुरुस्त शरीर को सुंदरता का मानक माना जाता है, लेकिन इथियोपिया की बोदी जनजाति की धारणा इससे बिलकुल भिन्न है। यहां मोटे और भारी शरीर वाले पुरुषों को सबसे आकर्षक और सम्मानित माना जाता है।
का'एल समारोह की विशेषता
बोदी जनजाति हर साल एक विशेष समारोह, जिसे “का'एल” कहा जाता है, का आयोजन करती है। यह एक प्रतियोगिता होती है जिसमें युवा पुरुष भाग लेते हैं। हर परिवार अपने एक अविवाहित बेटे को इस प्रतियोगिता के लिए चुनता है। चुने गए युवक को लगभग 6 महीने तक विशेष तैयारी करनी होती है, जिसमें उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक वजन बढ़ाना होता है।
इस दौरान, वे अपनी झोपड़ी में रहते हैं और अधिक शारीरिक श्रम नहीं करते। उनका मुख्य आहार गाय का दूध और पशुओं का खून होता है, जिसे वे जानवरों को मारकर नहीं लेते, बल्कि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खून निकालते हैं और जानवरों की अच्छी देखभाल करते हैं, क्योंकि उन्हें पवित्र माना जाता है।
गांव की सामुदायिक देखभाल
गांव के सभी लोग इन युवकों की देखभाल करते हैं। उन्हें आराम से रहने और खाने की सभी सुविधाएं दी जाती हैं, क्योंकि यह प्रतियोगिता पूरे समुदाय के लिए गर्व का विषय होती है। 6 महीने की तैयारी के बाद, सभी प्रतिभागी समारोह में शामिल होते हैं, जहां वे अपने शरीर पर मिट्टी और राख लगाकर आते हैं और गर्व से अपने भारी शरीर का प्रदर्शन करते हैं।
विजेता का सम्मान
इस प्रतियोगिता में जिस युवक का शरीर सबसे अधिक मोटा होता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है। उसे कोई नकद पुरस्कार नहीं मिलता, लेकिन समाज में उसे बहुत सम्मान और पहचान मिलती है। वह जीवन भर के लिए जनजाति का नायक बन जाता है।
बोदी जनजाति की महिलाएं बड़े पेट और भारी शरीर वाले पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं, क्योंकि उनके लिए बड़ा शरीर ताकत, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक होता है।
परंपरा में बदलाव
हालांकि, आधुनिक समय में यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है और समाप्ति के कगार पर है। फिर भी, यह अनोखी परंपरा हमें यह याद दिलाती है कि सुंदरता का अर्थ हर समाज और संस्कृति में भिन्न हो सकता है। जहां एक जगह पतलापन फैशन है, वहीं बोदी जनजाति में मोटे पुरुष सबसे आकर्षक माने जाते हैं।
