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बेंगलुरु से माइक्रोसॉफ्ट तक: दादी के साथ पोते की प्रेरणादायक यात्रा

बेंगलुरु से एक दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जहां माइक्रोसॉफ्ट के सीनियर मैनेजर वेंकटेश बजाज ने अपनी 81 वर्षीय दादी को अपने ऑफिस का दौरा कराया। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास था, क्योंकि उन्होंने अपनी दादी के साथ इस सफलता का जश्न मनाया। वेंकटेश ने अपनी दादी के साथ इस पल को साझा करते हुए बताया कि यह उनके जीवन के किसी भी प्रमोशन से बड़ा था। जानें इस प्रेरणादायक यात्रा के बारे में और कैसे दादी ने अपने पोते की सफलता पर गर्व महसूस किया।
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बेंगलुरु से माइक्रोसॉफ्ट तक: दादी के साथ पोते की प्रेरणादायक यात्रा

सफलता का जश्न अपनों के साथ


नई दिल्ली: जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में ऊंचाइयों को छूता है, तो उस सफलता का असली आनंद तब तक अधूरा रहता है जब तक कि उसमें अपने प्रियजनों की खुशी शामिल न हो। आज की युवा पीढ़ी कॉर्पोरेट क्षेत्र में बड़ी सफलताएं हासिल करने के बाद अपने परिवार और बुजुर्गों को इस खुशी का हिस्सा बना रही है।


दादी का पहला ऑफिस दौरा

एक दिल को छू लेने वाला और प्रेरणादायक किस्सा बेंगलुरु से सामने आया है, जहां माइक्रोसॉफ्ट के एक सीनियर मैनेजर ने अपनी 81 वर्षीय दादी को पहली बार अपने अत्याधुनिक ऑफिस का दौरा कराया।


लिंक्डइन पर वायरल पोस्ट

वेंकटेश बजाज, जो माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर मैनेजर हैं, ने इस अद्भुत अनुभव को लिंक्डइन पर एक भावुक पोस्ट के माध्यम से साझा किया। उन्होंने अपनी दादी के साथ ऑफिस की एक तस्वीर साझा करते हुए इस पल को अपने जीवन के किसी भी प्रमोशन या पुरस्कार से बड़ा बताया। यह कहानी अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रही है और लोगों के दिलों को छू रही है।


मंगरुलपीर से माइक्रोसॉफ्ट तक का सफर

अपनी पोस्ट में, वेंकटेश ने अपने अतीत को याद करते हुए बताया कि उनका पालन-पोषण महाराष्ट्र के एक छोटे से कस्बे 'मंगरुलपीर' में हुआ था। उस समय वहां कॉर्पोरेट जगत की कोई जानकारी या सुविधाएं नहीं थीं।


बचपन का सपना

बचपन में, वे टेलीविजन पर दिखने वाली भव्य इमारतों को देखकर अचंभित होते थे और हमेशा सपना देखते थे कि एक दिन वे भी ऐसी किसी जगह पर काम करेंगे। एक दशक से अधिक संघर्ष के बाद जब उनका सपना पूरा हुआ, तो उन्होंने अपनी इस सफलता को सबसे पहले अपनी दादी के साथ साझा करने का निर्णय लिया।


दादी का हैरान होना

यह वेंकटेश की दादी का किसी आधुनिक कॉर्पोरेट ऑफिस का पहला अनुभव था। उन्होंने वहां की तकनीक और कार्य संस्कृति को देखकर बहुत उत्सुकता दिखाई। बजाज ने बताया कि उनकी दादी वहां के काम के स्तर को देखकर चकित थीं और बार-बार पूछ रही थीं कि यहां इतने बड़े पैमाने पर काम कैसे होता है।


दादी का गर्व

सच्ची खुशी का क्षण तब आया जब दादी ने पोते के काम को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, 'अरे, तू तो बहुत बड़ा काम करता है।' वेंकटेश के अनुसार, इस एक वाक्य ने उनके दिल को गर्व से भर दिया, जो किसी भी बड़े कॉर्पोरेट सम्मान से कहीं अधिक था। उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी कई पीढ़ियों के बलिदान का चक्र आज पूरा हो गया है।


दादी की प्रगतिशील सोच

वेंकटेश ने अपनी पोस्ट में दादी के जीवन के प्रति दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी दादी के पास औपचारिक शिक्षा नहीं थी, लेकिन उनकी सोच हमेशा प्रगतिशील रही। उन्होंने जीवन के अनुभवों से वह ज्ञान और बुद्धिमत्ता हासिल की जो किसी भी डिग्री से ऊपर है।


नेटिजन्स की प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर लोग भावुक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। नेटिजन्स का कहना है कि माता-पिता को ऑफिस ले जाना आम बात है, लेकिन अपनी जड़ों को याद रखते हुए दादी को कॉर्पोरेट दुनिया दिखाना और उन्हें इस तरह का सम्मान देना वास्तव में प्रशंसनीय है।