2026 में माघ मेले का महत्व और पवित्र स्नान की तिथियाँ
माघ मेला 2026: धार्मिक महत्व
नई दिल्ली: नया साल 2026 धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। ज्योतिष के अनुसार, यह वर्ष सूर्य का वर्ष है, जिसका अर्थ है कि सूर्य की ऊर्जा कई लोगों के जीवन पर प्रभाव डालेगी। इसके साथ ही, भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक, माघ मेला, जल्द ही आरंभ होने वाला है। यह भव्य मेला हर साल हिंदू महीने माघ में आयोजित होता है और देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
माघ मेले की शुरुआत और अवधि
माघ मेला 3 जनवरी, 2026 को पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान के साथ शुरू होगा। यह मेला 40 दिनों से अधिक समय तक चलेगा और 15 फरवरी, 2026 को समाप्त होगा, जो महाशिवरात्रि का दिन भी है। इस अवधि में कई धार्मिक त्योहार और शुभ स्नान की तिथियाँ होंगी। श्रद्धालु पवित्र प्रयागराज में संगम पर एकत्रित होंगे, जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियाँ मिलती हैं।
कल्पवास की प्रथा
कई लोग कल्पवास के लिए प्रयागराज आते हैं, जो एक आध्यात्मिक प्रथा है। इसमें भक्त माघ मेले की पूरी अवधि के लिए संगम के निकट साधारण और अनुशासित जीवन जीते हैं। माना जाता है कि इस दौरान पवित्र स्नान और दान करने से आध्यात्मिक लाभ और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। माघ मेले की तैयारी कई महीनों से चल रही थी और अब इस भव्य धार्मिक आयोजन के लिए सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं।
पवित्र स्नान की तिथियाँ
पौष पूर्णिमा- 3 जनवरी
मकर संक्रांति- 14 जनवरी
मौनी अमावस्या- 18 जनवरी
बसंत पंचमी- 23 जनवरी
माघी पूर्णिमा- 1 फरवरी
महाशिवरात्रि- 15 फरवरी
इन तिथियों पर पवित्र स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। माघ मेले के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। किसी को धोखा देना, झूठ बोलना और गलत व्यवहार से बचना चाहिए। मांस, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल सात्विक भोजन करना चाहिए। पवित्र स्नान के समय लोगों को शांत और सम्मानजनक रहना चाहिए, मजाक करने से बचना चाहिए और विनम्रता से बात करनी चाहिए।
