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2026 में होली पर चंद्र ग्रहण: पूजा और उत्सव के लिए ज्योतिषीय सलाह

2026 में होली पर एक विशेष चंद्र ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा, जो लगभग 100 वर्षों बाद हो रहा है। इस लेख में जानें कि कैसे इस ग्रहण के दौरान पूजा और होली मनाने के लिए ज्योतिषीय सलाह का पालन करें। पंडित प्रतीक मिश्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल के दौरान धार्मिक कार्यों में रुकावट आएगी। जानें कि होलिका दहन और रंग खेलने के लिए सही समय क्या होगा और कैसे इस अवसर का आनंद लिया जा सकता है।
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2026 में होली पर चंद्र ग्रहण: पूजा और उत्सव के लिए ज्योतिषीय सलाह

विशेष खगोलीय घटना का महत्व

नई दिल्ली: हर साल होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है, जो अच्छाई की बुराई पर विजय, भाईचारे और रंगों की खुशी का प्रतीक है। लेकिन 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर एक विशेष खगोलीय घटना, चंद्र ग्रहण, इस उत्सव से जुड़ रही है। यह घटना लगभग 100 वर्षों बाद हो रही है, जब होलिका दहन और रंगों की होली दोनों पर ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिष के अनुसार, सूतक काल लगने से धार्मिक कार्यों में रुकावट आती है, जिससे लोग चिंतित हैं कि वे पूजा, दहन और उत्सव कैसे मनाएं। इस विषय पर हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित प्रतीक मिश्र से चर्चा की गई है।


ग्रहण का समय और प्रभाव

3 मार्च 2026 को पहला चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक चलेगा। भारत के विभिन्न हिस्सों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों में चंद्रोदय के समय यह 30-35 मिनट तक दिखाई देगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जो पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों पर रोक लगाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान वर्जित माने जाते हैं।


होलिका दहन की उलझन और समाधान

फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 2 मार्च को भद्रा का प्रभाव रहेगा, जबकि 3 मार्च को ग्रहण और सूतक है। पंडित प्रतीक मिश्र के अनुसार, होलिका दहन भद्रा और सूतक से मुक्त समय में किया जा सकता है, क्योंकि यह महिलाओं द्वारा बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। प्रमुख पंचांगों के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद प्रदोष काल में दहन करना सुरक्षित होगा, भले ही पूर्णिमा तिथि खत्म हो जाए।


पूजन और होली मनाने का तरीका

महिलाओं को 2 मार्च को होली का पूजन करना चाहिए, क्योंकि 3 मार्च सुबह 6:20 बजे से सूतक शुरू हो जाएगा। दहन के लिए 3 मार्च शाम ग्रहण के बाद का समय उचित रहेगा। कुछ पंचांग भद्रा में भी दहन की अनुमति देते हैं, लेकिन सुरक्षित विकल्प ग्रहणोपरांत है। पंडित जी का कहना है कि ऐसी स्थिति दुर्लभ है और इससे कोई दोष नहीं लगता, बस समय का ध्यान रखना आवश्यक है।


उपाय और सकारात्मक दृष्टिकोण

ग्रहण के समय घर में शांति बनाए रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। होलिका दहन के बाद रंग खेलते समय परिवार में कलह दूर करने के लिए सरसों का तेल या काले तिल का दान करें। बुरी नजर से बचाव के लिए नींबू-मिर्च की माला घर के दरवाजे पर लगाएं। यह संयोग चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से यह सकारात्मक बदलाव ला सकता है। त्योहार का आनंद लें और नियमों का पालन करें।