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26 अप्रैल 2026 का पंचांग: जानें शुभ और अशुभ समय के बारे में

26 अप्रैल 2026 का पंचांग विशेष महत्व रखता है, जिसमें शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया गया है। इस दिन वैशाख मास की दशमी तिथि के साथ महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं। जानें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रमा की स्थिति, और विशेष मुहूर्त के बारे में। इसके साथ ही, अशुभ समय और ज्योतिषीय संकेतों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें। यह जानकारी आपके धार्मिक और ज्योतिषीय कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।
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26 अप्रैल 2026 का पंचांग: जानें शुभ और अशुभ समय के बारे में

पंचांग का महत्व


नई दिल्ली: सनातन परंपरा में पंचांग का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन के शुभ और अशुभ समय का निर्धारण करता है। 26 अप्रैल 2026, रविवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के साथ महत्वपूर्ण योग बन रहा है, जो धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है।


सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय सुबह 5:45 बजे और सूर्यास्त शाम 6:53 बजे होगा। चंद्रमा का उदय दोपहर 2:10 बजे और अस्त 27 अप्रैल की सुबह 3:03 बजे होगा। दशमी तिथि शाम 6:06 बजे तक प्रभावी रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन दशमी तिथि का प्रभाव बना रहेगा।


नक्षत्र, योग और करण

26 अप्रैल को मघा नक्षत्र शाम 8:27 बजे तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। वृद्धि योग रात 10:28 बजे तक प्रभावी रहेगा। करण की बात करें तो तैतिल करण सुबह 6:13 बजे तक रहेगा, जबकि पूरे दिन वणिज योग का संयोग रहेगा।


ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:18 बजे से 5:01 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा-पाठ और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।


शुभ मुहूर्त

इस दिन कई महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:



  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:53 बजे से 12:45 बजे तक - इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 बजे से 3:23 बजे तक - सफलता और विजय के लिए उत्तम समय।

  • अमृत काल: शाम 6:01 बजे से 7:38 बजे तक।

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:52 बजे से 7:14 बजे तक।


इसके अलावा, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:53 बजे से 7:58 बजे तक रहेगी, जबकि निशिता मुहूर्त रात 11:57 बजे से 27 अप्रैल की देर रात 12:40 बजे तक रहेगा। रवि योग सुबह 5:45 बजे से शाम 8:27 बजे तक प्रभावी रहेगा।


अशुभ समय

दिन के कुछ समय ऐसे भी हैं, जिनमें नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है:



  • राहुकाल: शाम 5:15 बजे से 6:53 बजे तक

  • यमगण्ड: दोपहर 12:19 बजे से 1:58 बजे तक

  • गुलिक काल: दोपहर 3:36 बजे से 5:15 बजे तक

  • दुर्मुहूर्त: शाम 5:08 बजे से 6:01 बजे तक

  • वर्ज्य समय: सुबह 8:16 बजे से 9:53 बजे तक


विशेष योग और ज्योतिषीय संकेत

इस दिन गण्ड मूल और विडाल योग सक्रिय रहेंगे, जो सावधानी बरतने का संकेत देते हैं। बाण अग्नि दोपहर 4:30 बजे तक रहेगा, जबकि ध्रुव और गर समय शाम 6:06 बजे तक प्रभावी रहेगा।


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अशुभ समय में विशेष सतर्कता रखनी चाहिए और राहुकाल व दुर्मुहूर्त में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए।